न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
पटना – बिहार में मानसून की सक्रियता और संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शनिवार को सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक करेंगे। मुख्यमंत्री सचिवालय में आयोजित होने वाली यह बैठक दिन में 11:30 बजे शुरू होगी। बैठक की अध्यक्षता स्वयं मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी करेंगे। इसमें राज्य में मानसून के दौरान बाढ़ नियंत्रण, तटबंधों की स्थिति, जल निकासी व्यवस्था तथा विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। आगामी दिनों में भारी बारिश और नदियों के जलस्तर में संभावित वृद्धि को ध्यान में रखते हुए विभाग की तैयारियों का भी आकलन किया जाएगा।
हाईलाइट्स –
- मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आज 11:30 बजे सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की समीक्षा बैठक करेंगे।
- बैठक में उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी भी मौजूद रहेंगे।
- जल संसाधन विभाग और मुख्यमंत्री सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारी बैठक में शामिल होंगे।
- मानसून के दौरान संभावित बाढ़ से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की जाएगी।
- मुख्यमंत्री अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करेंगे।
उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी समेत कई अधिकारी रहेंगे मौजूद
इस उच्चस्तरीय बैठक में उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी भी मौजूद रहेंगे। इसके अलावा जल संसाधन विभाग के सभी वरिष्ठ अधिकारी, अभियंता और मुख्यमंत्री सचिवालय के अधिकारी भी बैठक में भाग लेंगे। विभाग की ओर से बाढ़ से निपटने के लिए की गई तैयारियों, संवेदनशील क्षेत्रों में किए गए कार्यों और आपातकालीन व्यवस्था से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। अधिकारियों से विभिन्न योजनाओं की वर्तमान स्थिति और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता के संबंध में भी जानकारी ली जाएगी।
बाढ़ से निपटने की तैयारियों की होगी समीक्षा
बैठक का मुख्य उद्देश्य मानसून के दौरान राज्य में उत्पन्न होने वाली बाढ़ की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए की गई तैयारियों की समीक्षा करना है। हर वर्ष कई जिलों में बाढ़ की समस्या सामने आती है, जिससे बड़ी संख्या में लोग प्रभावित होते हैं। ऐसे में सरकार पहले से ही आवश्यक तैयारियों को मजबूत करने पर जोर दे रही है। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देंगे और यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे कि किसी भी आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आए। साथ ही संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी रखने और त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था को और मजबूत करने पर भी चर्चा होने की संभावना है।
