न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
पटना – राजधानी पटना में CNG उपभोक्ताओं को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। गैस आपूर्ति करने वाली कंपनी GAIL (India) Limited ने CNG की कीमतों में 2 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें लागू होने के बाद अब पटना के विभिन्न CNG पंपों पर गैस 92.90 रुपये प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराई जा रही है। पंप संचालकों ने पुष्टि की है कि संशोधित कीमतें तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं। इस बढ़ोतरी का कारण आपूर्ति लागत और संचालन खर्च में हुई वृद्धि बताया जा रहा है। लगातार बदलती ईंधन कीमतों के बीच यह फैसला आम उपभोक्ताओं के लिए एक और आर्थिक चुनौती बनकर सामने आया है, खासकर उन लोगों के लिए जो रोजाना CNG आधारित वाहनों पर निर्भर रहते हैं।
हाइलाइट्स –
- पटना में CNG के दाम में 2 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी
- नई दर 92.90 रुपये प्रति किलो लागू
- ऑटो और टैक्सी चालकों की कमाई पर पड़ेगा असर
- रोजाना सफर करने वाले यात्रियों की जेब पर बढ़ेगा बोझ
- बढ़ती ईंधन कीमतों से जनता में नाराजगी
- आपूर्ति और परिचालन लागत बढ़ने से कीमत संशोधित
ऑटो-टैक्सी और कमर्शियल वाहन चालकों पर सबसे ज्यादा असर
CNG की कीमत बढ़ने का सबसे बड़ा असर ऑटो, टैक्सी और अन्य व्यावसायिक वाहनों पर पड़ने की संभावना है। पटना में बड़ी संख्या में लोग रोजाना सस्ते और सुविधाजनक परिवहन के लिए CNG वाहनों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में ईंधन महंगा होने से न केवल चालकों की रोजमर्रा की लागत बढ़ेगी, बल्कि यात्रियों के किराए पर भी असर पड़ सकता है। कई ऑटो चालकों ने चिंता जताई है कि पहले से सीमित कमाई में अब अतिरिक्त बोझ संभालना मुश्किल होगा। उनका कहना है कि या तो उन्हें किराया बढ़ाना पड़ेगा या फिर अपनी आय में कटौती करनी होगी, जिससे सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ेगा।
लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों से जनता में नाराजगी
पिछले कुछ समय से पेट्रोल, डीजल और CNG जैसी ईंधन कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, जिससे आम लोगों का बजट प्रभावित हो रहा है। हाल ही में पेट्रोल और डीजल के दामों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई थी, जिसने महंगाई को और बढ़ा दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन दरों में बार-बार होने वाला बदलाव सीधे तौर पर परिवहन लागत और दैनिक जीवन की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर असर डालता है। वहीं आम जनता का कहना है कि लगातार बढ़ती मंहगाई से घर का बजट बिगड़ रहा है और सरकार को इसके नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाना चाहिए।
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