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आपूर्ति संघ का आंदोलन, 26 अगस्त तक काला बिल्ला लगाकर विरोध


न्यूज 11 भारत/बिहार डेस्क
राहुल कुमार/शेरघाटी:
बिहार आपूर्ति सेवा संघ ने राशन कार्ड अभियान में निर्धारित लक्ष्य, कम समय-सीमा और मूलभूत संसाधनों के अभाव में कार्य कराने के विरोध में चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है। संघ के अनुसार राज्य के आपूर्ति पदाधिकारियों एवं कर्मियों की वर्षों से लंबित मांगों पर विभागीय स्तर से कोई ठोस निर्णय नहीं होने के कारण यह कदम उठाना पड़ा है। आंदोलन के प्रथम चरण में 20 से 26 अगस्त तक राज्य के सभी आपूर्ति पदाधिकारी काला बिल्ला लगाकर सांकेतिक विरोध दर्ज कराएंगे। संघ ने स्पष्ट किया है कि इस दौरान विभागीय और जनहित के कार्य सामान्य रूप से चलते रहेंगे। इसके बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो सामूहिक अवकाश और उसके बाद हड़ताल का निर्णय लिया जा सकता है।

संघ ने 17 अगस्त को जारी प्रेस नोट में कहा है कि आंदोलन किसी प्रकार के टकराव या असहयोग की भावना से नहीं किया जा रहा है। वर्षों से पत्राचार, वार्ता और विभागीय स्तर पर मांग रखने के बाद भी निर्णयों का अनुपालन नहीं होने के कारण पदाधिकारियों में असंतोष है। संघ का कहना है कि उसने आज तक किसी सरकारी अभियान में असहयोग नहीं किया है और आगे भी जनहित के कार्यों को बाधित करना उसका उद्देश्य नहीं है।

11.04 लाख नये राशन कार्ड बनाने का लक्ष्य

संघ ने मुख्यमंत्री के निर्देश पर चल रहे 11,04,425 नये राशन कार्ड निर्गमन अभियान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई है। हालांकि संघ का कहना है कि जमीनी स्तर पर अभियान को पूरा करने में कई व्यावहारिक और तकनीकी समस्याएं सामने आ रही हैं। सबसे बड़ी समस्या निर्धारित समय-सीमा को लेकर है।

संघ के अनुसार राशन कार्ड निर्गमन लोक सेवा के अधिकार अधिनियम के तहत अधिसूचित सेवा है, जिसके लिए 30 दिनों की समय-सीमा निर्धारित है। इसके बावजूद विभागीय निर्देश में स्थलीय जांच के लिए टी+1, सहायक जिला आपूर्ति पदाधिकारी की जांच के लिए टी+2 और अनुमंडल पदाधिकारी के अंतिम निर्णय के लिए बेहद कम समय निर्धारित किया गया है। संघ का दावा है कि इतने कम समय में आवेदक की स्थलीय जांच के साथ-साथ राशन कार्ड के लिए निर्धारित सभी अपवर्जन मानकों की जांच करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।

संघ ने कहा है कि यदि जांच औपचारिकता बनती है और बाद में किसी अपात्र व्यक्ति का राशन कार्ड निर्गत पाया जाता है तो उसकी जवाबदेही संबंधित क्षेत्रीय पदाधिकारी पर ही आएगी।

गणित के आधार पर लक्ष्य तय करने पर सवाल

संघ ने राशन कार्ड के लक्ष्य निर्धारण की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया है। संघ के मुताबिक विभागीय पत्र के आधार पर NFSA की अधिकतम सीमा और वर्तमान लाभुकों के बीच बची संख्या को औसत परिवार आकार से भाग देकर 11.04 लाख नये राशन कार्ड का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

संघ का कहना है कि यह लक्ष्य किसी क्षेत्रीय सर्वेक्षण या वास्तविक पात्र परिवारों की संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि गणितीय गणना से तय किया गया है। संघ के अनुसार NFSA की सीलिंग अधिकतम अनुमेय सीमा है, यह इस बात का प्रमाण नहीं है कि उतने पात्र परिवार वास्तव में जमीन पर मौजूद हैं।

संघ ने कहा कि पिछले वर्षों में पलायन, मृत्यु तथा आर्थिक स्थिति में बदलाव के कारण अनेक परिवार अपवर्जन की श्रेणी में आ चुके हैं। ऐसे में वास्तविक पात्र परिवारों की संख्या का सर्वेक्षण जरूरी है।

ई-केवाईसी ने बढ़ाई परेशानी

नये राशन कार्ड अभियान में सभी लाभुकों का ई-केवाईसी अनिवार्य किए जाने के बाद आपूर्ति पदाधिकारियों की परेशानी और बढ़ गई है। संघ के अनुसार विभाग ने ई-केवाईसी अनिवार्य तो कर दिया, लेकिन लाभुकों की दुकानवार लंबित सूची उपलब्ध कराने की व्यवस्था नहीं की गई।

संघ ने सुझाव दिया था कि डीलरवार लंबित ई-केवाईसी सूची उपलब्ध कराई जाए, जिसमें आवेदन संख्या, लाभुक का नाम, मोबाइल नंबर, पंचायत या वार्ड तथा संबंधित पीडीएस दुकान का कोड हो। इससे संबंधित विक्रेता को सूची देकर शिविर के माध्यम से एक साथ ई-केवाईसी कराया जा सकता था। संघ का कहना है कि यह सुविधा नहीं मिलने से पदाधिकारियों को एक-एक लाभुक को स्वयं खोजकर संपर्क करना पड़ रहा है।

पोर्टल की तकनीकी समस्या का भी हवाला

संघ ने राशन कार्ड पोर्टल की तकनीकी समस्या को लेकर विभाग के ही पत्र का हवाला दिया है। संघ के अनुसार विभाग ने केंद्र सरकार को भेजे पत्र में SMART-PDS RCMS एप्लीकेशन में तकनीकी त्रुटियों का उल्लेख किया था। संघ का कहना है कि पोर्टल की समस्या के कारण आवेदन और राशन कार्ड निर्गमन की गति प्रभावित हुई। ऐसे में तकनीकी खामी के लिए क्षेत्रीय पदाधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगना उचित नहीं है।

अपने खर्च पर कर रहे काम, वाहन भी नहीं

संघ का आरोप है कि अभियान के लिए अतिरिक्त मानव संसाधन, कंप्यूटर, स्कैनर, वाहन और अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। स्थलीय जांच और प्रिंट आउट आदि में प्रति राशन कार्ड करीब 250 से 300 रुपये तक का खर्च पदाधिकारियों को अपने स्तर से वहन करना पड़ रहा है।

संघ ने दावा किया कि कई पदाधिकारियों से देर रात एक-दो बजे तक और अवकाश के दिनों में भी काम लिया जा रहा है। इसके बावजूद अतिरिक्त कार्य के एवज में भोजन, अल्पाहार अथवा क्षतिपूर्ति अवकाश की सुविधा नहीं मिल रही है।

एक दिन का वेतन रोकने का भी विरोध

संघ ने 17 जुलाई की घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि मोबाइल कॉल रिसीव नहीं होने अथवा जीपीएस लाइव लोकेशन उपलब्ध नहीं कराने के आधार पर बड़ी संख्या में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारियों और आपूर्ति निरीक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा गया तथा एक दिन का वेतन रोक दिया गया।

संघ का कहना है कि कई पदाधिकारी उस समय कार्यालय, क्षेत्र भ्रमण, बैठक या अन्य सरकारी कार्य में लगे थे। कुछ ने कॉल आने के बाद वापस संपर्क करने का प्रयास भी किया। संघ ने इस कार्रवाई को अनुचित बताते हुए रोका गया वेतन तत्काल वापस करने की मांग की है।

कार्यालय में मूलभूत सुविधाओं का अभाव

संघ ने प्रखंड आपूर्ति कार्यालयों में संसाधनों की कमी का भी मुद्दा उठाया है। संघ के अनुसार कई कार्यालयों में कुर्सी, टेबल, अलमारी और फाइल रैक जैसी मूलभूत सुविधाएं तक पर्याप्त नहीं हैं। ऑनलाइन कार्य के लिए लैपटॉप, मोबाइल और इंटरनेट की व्यवस्था भी पदाधिकारी अपने निजी संसाधनों से कर रहे हैं।

पीडीएस दुकानों की जांच, छापेमारी, सुदूर क्षेत्रों में भ्रमण, विधि-व्यवस्था और निर्वाचन कार्यों के लिए विभागीय वाहन उपलब्ध नहीं होने की बात भी संघ ने कही है।

16 साल पुराने आदेश का नहीं हुआ पालन

संघ ने वर्ष 2010 के विभागीय आदेश का हवाला देते हुए कहा कि प्रत्येक प्रखंड आपूर्ति कार्यालय में दो कमरे, दो सहायक और दो अनुसेवक उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था। संघ के अनुसार 16 वर्ष बीतने के बाद भी इस आदेश का समुचित अनुपालन नहीं हुआ।

संघ का दावा है कि वर्तमान में कई प्रखंड कार्यालयों में एक ही कार्यपालक सहायक के सहारे काम चल रहा है। इसी मानव बल से खाद्यान्न वितरण, ई-पॉस की निगरानी, आपूर्ति निरीक्षण, विधि-व्यवस्था, निर्वाचन कार्य और राशन कार्ड अभियान जैसे कई महत्वपूर्ण कार्य कराए जा रहे हैं।

करीब 200 पद रिक्त, प्रोन्नति भी लंबित

बिहार आपूर्ति सेवा संघ ने प्रोन्नति के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया है। संघ के अनुसार वर्ष 2023 के बाद संवर्ग में करीब दो वर्ष नौ माह से कोई प्रोन्नति नहीं हुई है। करीब 200 पद रिक्त होने के बावजूद विभागीय प्रोन्नति समिति की बैठक नहीं बुलाए जाने पर संघ ने नाराजगी जताई है।

संघ ने आपूर्ति निरीक्षकों की प्रथम प्रोन्नति पर वेतन स्तर आठ के स्थान पर वेतन स्तर नौ का लाभ देने की मांग की है। साथ ही संवर्ग पुनर्गठन कर नई संवर्ग नियमावली लागू करने की मांग की गई है।

अधिकारी बढ़ाने के बजाय सहायक स्टाफ की जरूरत

संघ ने कहा है कि 69वीं और 70वीं बीपीएससी के माध्यम से बड़ी संख्या में पदाधिकारियों की नियुक्ति की गई है, लेकिन उनके अधीन काम करने के लिए पर्याप्त सहायक कर्मी नहीं हैं। संघ का कहना है कि वर्तमान आवश्यकता प्रखंड स्तर पर डाटा एंट्री ऑपरेटर, लिपिक और अनुसेवक उपलब्ध कराने की है।

आपूर्ति निरीक्षकों को अधिकार देने की मांग

संघ ने आपूर्ति निरीक्षकों के अधिकार बढ़ाने की भी मांग की है। संघ के अनुसार पीडीएस दुकानों की नियमित जांच की जिम्मेदारी आपूर्ति निरीक्षकों पर है, लेकिन अनियमितता मिलने पर वे स्वयं कारण बताओ नोटिस जारी नहीं कर सकते और न ही आवंटन पर प्रभावी नियंत्रण रखते हैं।

संघ ने लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली नियंत्रण आदेश में संशोधन कर पणन पदाधिकारी और आपूर्ति निरीक्षक को कारण पृच्छा जारी करने, आवंटन की अनुशंसा करने तथा अनुज्ञप्ति निलंबन की शक्ति देने की मांग की है।

सात पदाधिकारियों के निलंबन का विरोध

संघ ने ‘जीरो ऑफिस डे’ अभियान के दौरान सात आपूर्ति पदाधिकारियों के निलंबन का भी विरोध किया है। संघ का कहना है कि जिन मामलों में निम्न गुणवत्ता वाले खाद्यान्न को आधार बनाकर कार्रवाई की गई, उस खाद्यान्न की आपूर्ति टीपीडीएस गोदाम से हुई थी और उस पर क्षेत्रीय आपूर्ति पदाधिकारी का नियंत्रण नहीं था। संघ ने सभी संबंधित विभागीय कार्रवाई वापस लेने की मांग की है।

संघ की प्रमुख मांगें

संघ ने प्रखंड स्तर पर विभागीय वाहन या समुचित वाहन भाड़ा, कार्यालय के लिए कंप्यूटर, प्रिंटर, स्कैनर, लैपटॉप, इंटरनेट समेत जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की है। राशन कार्ड से जुड़े कार्यों के लिए स्पष्ट विभागीय आदेश जारी करने, आपूर्ति निरीक्षकों को प्रथम प्रोन्नति पर वेतन स्तर नौ देने और लंबित डीपीसी कराने की मांग भी की गई है।

इसके अलावा प्रत्येक प्रखंड कार्यालय में दो कमरे, दो सहायक और दो अनुसेवक उपलब्ध कराने, आपूर्ति निरीक्षक का पदनाम प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी करने, उसे राजपत्रित पद घोषित करने तथा निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी की शक्ति देने की मांग की गई है।

संघ ने राशन कार्ड अभियान के लिए अतिरिक्त मानव बल, कंप्यूटर, स्कैनर, इंटरनेट और वाहन उपलब्ध कराने, तकनीकी विफलता या लक्ष्य पूरा नहीं होने पर दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने तथा 17 जुलाई की वेतन कटौती वापस लेने की मांग की है। साथ ही राशन कार्ड के लिए 30 दिनों की वैधानिक समय-सीमा बहाल कर टी+1, टी+2 और टी+3 जैसी कम समय-सीमा वापस लेने की मांग की गई है।

संघ ने कहा है कि यदि आंदोलन की निर्धारित तिथि से पहले सरकार और विभाग के स्तर पर वार्ता होती है और मांगों के संबंध में लिखित निर्णय जारी किया जाता है तो प्रस्तावित आंदोलन को स्थगित करने पर विचार किया जा सकता है। संघ का कहना है कि उसका उद्देश्य काम से पीछे हटना नहीं, बल्कि पर्याप्त संसाधन और विधिसम्मत व्यवस्था के साथ काम करना है।



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