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सबकुछ तय था, फिर क्यों रुक गई मुंगेर एयरपोर्ट की उड़ान? सामने आई बड़ी वजह


न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क 

दिवाकर कुमार / मुंगेर-   मुंगेरवासियों का वर्षों पुराना हवाई सफर का सपना फिलहाल अधूरा ही रह सकता है। केंद्र सरकार की उड़ान योजना से मुंगेर एयरपोर्ट को बाहर किए जाने की खबर सामने आने के बाद लोगों में निराशा बढ़ गई है। सफियाबाद स्थित हवाई अड्डे से छोटे विमानों की सेवा शुरू होने की उम्मीद लंबे समय से की जा रही थी, लेकिन तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों ने इस योजना की रफ्तार रोक दी है। ताजा तकनीकी रिपोर्ट के मुताबिक वर्तमान रनवे की लंबाई केवल 758 मीटर और चौड़ाई 25 मीटर है, जबकि 19 सीट वाले छोटे विमानों के सुरक्षित टेकऑफ और लैंडिंग के लिए कम से कम 1250 से 1400 मीटर लंबे रनवे की आवश्यकता होती है। ऐसे में मौजूदा स्थिति में यहां नियमित विमान सेवा शुरू करना संभव नहीं माना जा रहा है।

हाईलाइट्स – 

  • उड़ान योजना से मुंगेर एयरपोर्ट के बाहर होने की खबर
  • रनवे विस्तार के लिए जमीन अधिग्रहण बना बड़ी बाधा
  • मौजूदा रनवे छोटे विमानों के लिए भी पर्याप्त नहीं
  • अब सिर्फ हेलीकॉप्टर सेवा शुरू होने की संभावना
  • पर्यटन, व्यापार और उद्योग को लग सकता है झटका
  • सुल्तानगंज एयरपोर्ट से मुंगेर को भविष्य में मिल सकती है राहत

घनी आबादी और महंगी जमीन से बढ़ी मुश्किल

एयरपोर्ट के रनवे विस्तार के लिए बड़े पैमाने पर जमीन अधिग्रहण की जरूरत है, लेकिन सफियाबाद एयरपोर्ट के आसपास अब घनी आबादी बस चुकी है। जमीन की कीमतें भी काफी बढ़ गई हैं, जिससे परियोजना आर्थिक रूप से बेहद महंगी और प्रशासनिक रूप से जटिल हो गई है। सूत्रों के अनुसार, इन्हीं कारणों से सरकार फिलहाल इस योजना से पीछे हटती नजर आ रही है। हालांकि एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की टीम ने वर्ष 2025 में निरीक्षण के दौरान रनवे विस्तार की संभावना जताई थी, लेकिन हालिया रिपोर्ट के बाद राज्य सरकार ने इस परियोजना पर फिलहाल ब्रेक लगा दिया है। अब यहां केवल हेलीकॉप्टर सेवा विकसित किए जाने की संभावना बची हुई है। इससे आम लोगों की नियमित हवाई यात्रा की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है।

पर्यटन और व्यापार को मिल सकता था बड़ा फायदा

अगर मुंगेर से हवाई सेवा शुरू होती, तो इसका सबसे बड़ा फायदा पर्यटन, व्यापार और उद्योग क्षेत्र को मिलता। धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान रखने वाला मुंगेर देश के बड़े शहरों से सीधे जुड़ सकता था। योग नगरी के रूप में प्रसिद्ध मुंगेर और बिहार स्कूल ऑफ योग में देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को काफी सुविधा मिलती। इसके अलावा व्यापारियों, छात्रों और मरीजों के लिए सफर आसान हो जाता, जिससे जिले के आर्थिक विकास को नई गति मिल सकती थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि मुंगेर से करीब 30 किलोमीटर दूर सुल्तानगंज में प्रस्तावित एयरपोर्ट परियोजना को यदि समय पर पूरा कर दिया जाए, तो उसका लाभ मुंगेर जिले को भी मिल सकता है। फिलहाल लोगों की निगाहें सरकार के अगले फैसले पर टिकी हैं कि आने वाले समय में इस परियोजना को लेकर क्या नई पहल की जाती है।

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