न्यूज 11 भारत/बिहार डेस्क
राहुल कुमार/शेरघाटी: अनुमंडल क्षेत्र से गुजरने वाले एनएच-19 पर सफर करना इन दिनों यात्रियों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। आमस थाना क्षेत्र के तारडीह से लेकर बाराचट्टी थाना क्षेत्र के काहुदाग तक करीब 46 किलोमीटर लंबे मार्ग पर कई स्थान दुर्घटना संभावित क्षेत्र बन चुके हैं। इन जगहों पर आए दिन सड़क हादसे हो रहे हैं। स्थानीय लोगों ने ऐसे स्थानों को अब ब्लैक स्पॉट और दुर्घटना जोन के नाम से पहचानना शुरू कर दिया है। बावजूद इसके हाईवे पर यातायात व्यवस्था को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।
एनएच-19 के रास्ते औरंगाबाद, गया, रांची, डाल्टेनगंज समेत झारखंड और बिहार के कई बड़े शहरों के लिए बड़ी संख्या में बसों और अन्य वाहनों का परिचालन होता है। यात्रियों को बैठाने और उतारने के लिए कई बस चालक हाईवे पर ही वाहन खड़ा कर देते हैं। बसों के आगे-पीछे टेंपो, ऑटो और ई-रिक्शा भी खड़े हो जाते हैं। इससे मुख्य सड़क पर वाहनों के परिचालन के लिए जगह कम पड़ जाती है। व्यस्त समय में स्थिति और खतरनाक हो जाती है।
हाईवे पर ही बना दिए गए बस पड़ाव
एनएच-19 पर कई स्थानों पर बस चालक सड़क किनारे ही बस खड़ी कर यात्रियों का इंतजार करते नजर आते हैं। यात्रियों को बैठाने की होड़ में चालक अचानक हाईवे पर वाहन रोक देते हैं। पीछे से तेज गति से आ रहे ट्रक और अन्य भारी वाहनों के चालकों को अचानक ब्रेक लगाना पड़ता है। ऐसे में टक्कर की आशंका बनी रहती है। कई बार छोटे वाहन बड़े वाहनों के बीच फंस जाते हैं, जिससे गंभीर हादसे की स्थिति पैदा हो जाती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हाईवे पर बसों के लिए निर्धारित ठहराव स्थल नहीं होने के कारण चालक मनमाने तरीके से सड़क पर ही वाहन खड़ा कर देते हैं। इससे यातायात व्यवस्था प्रभावित होने के साथ-साथ दुर्घटना का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है।
बैरिकेडिंग पार कर सड़क पार करते हैं यात्री
हाईवे पर वाहनों की भीड़ और जाम के बीच पैदल यात्रियों की परेशानी भी बढ़ गई है। एक ओर से दूसरी ओर जाने के लिए लोगों को कई स्थानों पर बैरिकेडिंग पार करनी पड़ती है। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी भारी वाहनों के बीच से सड़क पार करते दिखाई देते हैं। तेज गति से गुजरते ट्रक, बस और अन्य वाहनों के बीच सड़क पार करना किसी बड़े खतरे से कम नहीं है। स्थानीय लोगों के अनुसार, कई दुर्घटनाएं सड़क पार करने के दौरान भी होती रही हैं। इसके बावजूद संवेदनशील स्थानों पर पैदल यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई है।
रोशनी, रेडियम और चेतावनी संकेतों का अभाव
एनएच-19 पर दुर्घटनाओं के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। सड़क किनारे खड़े वाहनों पर पर्याप्त रेडियम और संकेतक नहीं लगे होने, स्ट्रीट लाइट व रोशनी की व्यवस्था के अभाव तथा चेतावनी संकेतकों के रखरखाव में कमी से रात के समय खतरा और बढ़ जाता है। कई जगह खड़े भारी वाहनों का पता पीछे से आने वाले चालकों को समय पर नहीं चल पाता। ऐसे में तेज गति से आने वाले वाहन खड़े ट्रकों से टकरा जाते हैं। आमस के सांवकला, मौलानाचक, हमजापुर क्रासिंग, शेरघाटी के गोपालपुर और पत्थलकट्टी के अलावा डोभी और बाराचट्टी क्षेत्र के कई स्थानों पर दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।
केस हिस्ट्री : लगातार हो रहे हादसे दे रहे खतरे का संकेत
18 जून : गोपालपुर में खड़े ट्रक से टक्कर, चालक की मौत
18 जून की रात शेरघाटी थाना क्षेत्र के गोपालपुर के समीप सड़क पर खड़े ट्रक में एक वाहन ने सीधी टक्कर मार दी। हादसे में राजस्थान निवासी चालक जोध राज की मौत हो गई। रात के समय हाईवे पर खड़े भारी वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था पर इस घटना ने सवाल खड़े किए।
18 जून : खड़े कोयला लदे ट्रक में दूसरे ट्रक ने मारी टक्कर
इसी दिन बंगाल से राजस्थान जा रहे कोयला लदे एक ट्रक को हाईवे पर खड़ा किया गया था। विपरीत दिशा से आ रहे दूसरे ट्रक ने जोरदार टक्कर मार दी। दुर्घटना में दोनों वाहनों को काफी नुकसान पहुंचा। घटना ने एक बार फिर हाईवे पर खड़े भारी वाहनों से पैदा होने वाले खतरे को उजागर किया।
19 जून : पत्थलकट्टी में युवती की मौत
19 जून को पत्थलकट्टी के समीप ट्रक की चपेट में आने से एक युवती की दर्दनाक मौत हो गई। हादसे के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश देखा गया। लोगों का कहना था कि हाईवे पर तेज गति से चलने वाले वाहनों और यातायात व्यवस्था की कमी के कारण दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है।
21 जून : सड़क पर बिखरी बालू से बाइक सवार घायल
21 जून की रात आमस थाना क्षेत्र के नारायणपुर मोड़ के समीप सड़क पर बिखरी बालू के कारण बाइक सवार दो युवक अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गए। हादसे में राजकुमार साव और प्रीतम गोंड घायल हो गए। सड़क पर निर्माण सामग्री या बालू बिखरे रहने से वाहन चालकों के लिए खतरा बढ़ जाता है।
23 जुलाई : पीपरघट्टी में सड़क पार करते समय युवक की मौत
डोभी थाना क्षेत्र के पीपरघट्टी के समीप 23 जुलाई को सड़क पार करने के दौरान नेहुटा गांव निवासी कुंदन कुमार की मौत हो गई। बताया गया कि वह रांची जाने के लिए बस पकड़ने जा रहा था। हाईवे पर यात्रियों की आवाजाही और बस पकड़ने के लिए सड़क पार करने की मजबूरी ने एक और जान ले ली।
मुख्य हाईवे लेन में ई-रिक्शा और जुगाड़ वाहनों पर रोक, फिर भी परिचालन
एनएच-19 की मुख्य लेन में ई-रिक्शा (टोटो), जुगाड़ वाहन और बिना परमिट वाले ऑटो का परिचालन सुरक्षा की दृष्टि से प्रतिबंधित है। परिवहन विभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर से यातायात व्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए ऐसे वाहनों को मुख्य हाईवे लेन से दूर रखने के निर्देश दिए जाते रहे हैं। इन वाहनों को सर्विस रोड अथवा आंतरिक शहरी मार्गों का उपयोग करना चाहिए।
इसके बावजूद शेरघाटी क्षेत्र में कई स्थानों पर टोटो, ऑटो और अन्य छोटे वाहन मुख्य हाईवे पर ही चलते और खड़े दिखाई देते हैं। यात्रियों को बैठाने के लिए अचानक वाहन रोकने से पीछे से आने वाले वाहनों के लिए परेशानी खड़ी हो जाती है।
जाम के साथ बढ़ रहा दुर्घटना का खतरा
हाईवे पर बस, ऑटो और ई-रिक्शा के बेतरतीब ठहराव से यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। सड़क की एक लेन में वाहन खड़े रहने के कारण दूसरे वाहनों को अचानक लेन बदलनी पड़ती है। पीछे से आ रहे तेज रफ्तार वाहनों को पर्याप्त समय नहीं मिलने पर टक्कर की स्थिति बन जाती है। खासकर रात और बारिश के समय खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन और एनएच प्रबंधन से दुर्घटना संभावित स्थलों को चिह्नित कर वहां पर्याप्त रोशनी, रेडियम, चेतावनी संकेतक और बैरिकेडिंग की व्यवस्था करने की मांग की है। साथ ही हाईवे पर बसों के लिए निर्धारित ठहराव स्थल बनाने, अवैध रूप से खड़े भारी वाहनों पर कार्रवाई करने और मुख्य लेन में ई-रिक्शा व ऑटो के परिचालन पर प्रभावी रोक लगाने की मांग की है।
लोगों का कहना है कि हादसा होने के बाद राहत और कार्रवाई करने से बेहतर है कि पहले ही उन कारणों को दूर किया जाए, जिनसे लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं। तारडीह से काहुदाग तक एनएच-19 पर बढ़ते हादसे अब महज संयोग नहीं, बल्कि यातायात व्यवस्था में मौजूद खामियों का संकेत दे रहे हैं।
