Voice of Eastern India

बिहार की बेटी ने रचा इतिहास, NDA रूट से वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर बनने वाली देश की पहली महिला बनीं दिव्यांशी


न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क: बिहार की बेटियों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अगर उन्हें आसमान छूने का मौका मिले, तो वे इतिहास रचने से पीछे नहीं हटतीं. सारण (छपरा) जिले के मढ़ौरा प्रखंड के अंतर्गत आने वाले गोपालपुर गांव की रहने वाली दिव्यांशी सिंह ने भारतीय वायुसेना (IAF) में फ्लाइंग ऑफिसर बनकर पूरे प्रदेश को गौरवान्वित किया है. हैदराबाद के पास दुंडीगल स्थित एयरफोर्स एकेडमी में आयोजित भव्य पासिंग आउट परेड के दौरान, ग्राउंड ड्यूटी ब्रांच में उनके ऑलराउंडर प्रदर्शन को देखते हुए देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उन्हें प्रतिष्ठित ‘प्रेसिडेंट प्लाक’ (President’s Plaque) सम्मान से सम्मानित किया.

एनडीए (NDA) के इतिहास में दर्ज हुआ दिव्यांशी का नाम

दिव्यांशी की यह कामयाबी सिर्फ एक नौकरी पाना नहीं, बल्कि देश की हर बेटी के लिए मील का पत्थर है. साल 2022 में जब केंद्र सरकार ने नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) के दरवाजे बेटियों के लिए खोले, तब दिव्यांशी ने इस बेहद कठिन परीक्षा को पास किया था. अब वह भारतीय वायुसेना की ग्राउंड ड्यूटी शाखा में देश की रक्षा करने वाली पहली एनडीए महिला कैडेट बन गई हैं. उनकी इस उपलब्धि ने आने वाली पीढ़ी की लड़कियों के लिए सेना में जाने का एक नया रास्ता खोल दिया है.

पुणे से हैदराबाद तक… कठिन तपस्या से हासिल किया मुकाम

एक सैन्य अधिकारी बनने का दिव्यांशी का सफर बेहद अनुशासन और कड़ी मेहनत से भरा रहा है. एनडीए में चुने जाने के बाद उन्होंने पुणे (खड़कवासला) में तीन साल की सबसे मुश्किल मिलिट्री ट्रेनिंग पूरी की. साल 2025 में उनकी लीडरशिप को देखते हुए उन्हें ‘कैडेट क्वार्टर मास्टर सार्जेंट’ की अहम जिम्मेदारी दी गई. इसके बाद उन्होंने हैदराबाद की एयरफोर्स एकेडमी में एक साल की स्पेशल ट्रेनिंग ली और 13 जून 2026 को आखिरकार फ्लाइंग ऑफिसर की वर्दी पहनकर पास आउट हुईं.

विरासत की शान: परिवार की 5वीं पीढ़ी ने संभाली देशसेवा की कमान

दिव्यांशी की रगों में देशसेवा का खून दौड़ता है. उनका परिवार पिछले कई दशकों से खाकी और ऑलिव ग्रीन वर्दी पहनकर देश की रक्षा कर रहा है. दिव्यांशी इस परिवार की पांचवीं पीढ़ी हैं जिन्होंने वर्दी पहनी है:

  • पिता: विनोद कुमार सिंह (भारतीय वायुसेना में वर्तमान में जूनियर वारंट ऑफिसर हैं).

  • दादा व परदादा: लालसाहेब सिंह और रामदेव सिंह (बिहार पुलिस में सेवाएं दे चुके हैं).

  • पूर्वज: लखन सिंह (ब्रिटिश काल में बंगाल पुलिस का हिस्सा थे).

केंद्रीय विद्यालय से हुई शुरुआती पढ़ाई, भाई कर रहा IIT दिल्ली से इंजीनियरिंग

दो भाई-बहनों में बड़ी दिव्यांशी की शुरुआती पढ़ाई देश के अलग-अलग कोनों में हुई, क्योंकि उनके पिता वायुसेना में थे. उन्होंने नागपुर, दिल्ली और आदमपुर के केंद्रीय विद्यालयों (KV) से शिक्षा पाई. उनकी मां अनीता देवी एक कुशल गृहिणी हैं, जिन्होंने दिव्यांशी को हमेशा आगे बढ़ने का हौसला दिया. दिव्यांशी का छोटा भाई मनोयोग सिंह सूर्यांश भी बेहद होनहार है और वर्तमान में आईआईटी (IIT) दिल्ली से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है. हालांकि इनका परिवार अभी दिल्ली में रहता है, लेकिन दादा-दादी आज भी पैतृक गांव गोपालपुर (सारण) में ही रहते हैं.

पूरे बिहार में जश्न का माहौल, बेटियों के लिए बनीं रोल मॉडल

जैसे ही हैदराबाद से दिव्यांशी के फ्लाइंग ऑफिसर बनने और रक्षा मंत्री द्वारा सम्मानित होने की तस्वीरें सामने आईं, उनके पैतृक गांव गोपालपुर समेत पूरे सारण जिले में जश्न शुरू हो गया. स्थानीय लोगों, शिक्षकों और नेताओं ने इसे बिहार के लिए सबसे गौरवशाली पल बताया है. रक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि दिव्यांशी की यह ऐतिहासिक सफलता भारतीय सेनाओं में महिलाओं की बढ़ती ताकत और नेतृत्व क्षमता का सबसे बड़ा और जीता-जागता उदाहरण है.



Source link

Leave A Reply

Your email address will not be published.