न्यूज 11 भारत / पटना डेस्क : बिहार में टीचरों के तबादले की नई नीति जल्द ही अमल में लाई जा सकती है। कुछ ही दिनों पहले ही सीएम सम्राट चौधरी ने एक सार्वजनिक मंच पर कहा था कि एजुकेशन को लेकर राज्य सरकार बेहद गंभीर है। सीएम ने कहा था कि शिक्षक चाहे जहां भी ट्रांसफर लें लेकिन उन्हें बच्चों को तो पढ़ाना ही पड़ेगा। शिक्षा विभाग ने राज्य में शिक्षकों के तबादले के लिए जो नई नीति बनाई है उसमें टीचरों को अब 30 ऑप्शन मिलेंगे। सिर्फ यही नहीं पहली बार नई नीति में शिक्षकों के ट्रांसफर में मेरिट को भी आधार बनाया जाएगा।
तबादले की नीति को मिला अंतिम रूप
जानकारी के अनुसार राज्य सरकार ने शिक्षकों के तबादले की नीति को अंतिम रूप दे दिया है। शिक्षा विभाग द्वारा इसकी तैयारी कर ली गई है और अब इस पर कैबिनेट की मुहर लगनी है। उम्मीद है कि अगली कैबिनेट बैठक में इस पर मुहर लग जाएगी। कैबिनेट की स्वीकृति के बाद तबादले की नीति के आधार पर शीघ्र शिक्षकों का ट्रांसफर किया जाएगा। सरकार की जुलाई में हर हाल में शिक्षकों के तबादले की प्रक्रिया पूरी कर लेने की तैयारी है।
शिक्षा विभाग का ट्रांसफर पर जोर
बता दें कि शिक्षा विभाग ने पिछले दिनों शिक्षकों के पदस्थापन और विद्यालयों में उनकी संख्या निर्धारण का मानक तय कर दिया है। इसके तहत किस स्कूल में, किस विषय में कितने शिक्षक होंगे, इसकी संख्या तय कर ली गयी है। बच्चों की संख्या के आधार पर शिक्षकों की संख्या निर्धारित करने के बाद विभाग अब ट्रांसफर पर जोर लगा रही है।
बीमार शिक्षकों के लिए विशेष सुविधा
नई नीति के तहत शिक्षकों को अपने मनपसंद विद्यालयों में से 30 को चुनने का ऑप्शन मिलेगा। अगर उनके पदस्थापन में संख्या की बाधा आई तो सबसे पहले पुराने शिक्षकों को तबादले का लाभ मिलेगा। गंभीर रूप से बीमार शिक्षकों को घर के पास ही तबादले का लाभ मिलेगा।
