न्यूज 11 भारत/बिहार डेस्क
राहुल कुमार/शेरघाटी: आगामी नौ सितंबर को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियों को लेकर शनिवार को अनुमंडलीय विधिक सेवा समिति, शेरघाटी के तत्वावधान में बैठक आयोजित की गई। जिला विधिक सेवा प्राधिकार, गया के निर्देश पर आयोजित बैठक में राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक से अधिक वादों का निष्पादन सुनिश्चित करने को लेकर विभागवार तैयारियों की समीक्षा की गई। बैठक की अध्यक्षता जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम-सह-अध्यक्ष, अनुमंडलीय विधिक सेवा समिति, शेरघाटी लवकुश कुमार ने की।
बैठक में विभिन्न सरकारी विभागों के साथ-साथ बैंकों के पदाधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान राष्ट्रीय लोक अदालत के उद्देश्य, कार्यप्रणाली और आम लोगों को मिलने वाले लाभ के संबंध में विस्तार से चर्चा की गई। अध्यक्ष ने संबंधित अधिकारियों को अपने-अपने विभाग से जुड़े ऐसे लंबित मामलों को चिह्नित करने का निर्देश दिया, जिनका आपसी सुलह एवं समझौते के आधार पर निष्पादन किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि लोक अदालत विवादों के त्वरित और सरल समाधान का प्रभावी माध्यम है। इसमें दोनों पक्षों की सहमति से मामलों का निपटारा किया जाता है। इससे पक्षकारों को लंबे समय तक न्यायालय की प्रक्रिया में समय और धन खर्च करने से राहत मिलती है। ऐसे में अधिक से अधिक सुलह योग्य मामलों को राष्ट्रीय लोक अदालत में लाकर उनका निष्पादन कराने की दिशा में गंभीरता से काम करने की जरूरत है।
समय पर नोटिस देने का निर्देश
बैठक में अध्यक्ष ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि चिह्नित किए गए मामलों के पक्षकारों को समय रहते नोटिस निर्गत किया जाए, ताकि उन्हें राष्ट्रीय लोक अदालत में उपस्थित होकर अपने मामलों का आपसी सहमति से समाधान कराने का अवसर मिल सके। उन्होंने विभागीय स्तर पर लंबित मामलों की सूची तैयार करने और संबंधित पक्षकारों से समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत की सफलता केवल मामलों की संख्या पर निर्भर नहीं करती, बल्कि अधिकाधिक पक्षकारों को इसकी प्रक्रिया से जोड़ना भी आवश्यक है। इसके लिए सभी संबंधित विभागों और बैंकों के अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ काम करना होगा।
विभिन्न विभागों के अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में वन विभाग के रेंजर, माप-तौल पदाधिकारी, विद्युत विभाग के कार्यपालक अभियंता, बीएसएनएल के पदाधिकारी, माइंस एंड मिनरल्स इंस्पेक्टर, प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
इसके अलावा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, बिहार ग्रामीण बैंक, को-ऑपरेटिव बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और यूको बैंक के पदाधिकारियों ने भी बैठक में हिस्सा लिया।
बैंकों से जुड़े मामलों के निपटारे पर भी रहेगा जोर
बैठक में बैंक से संबंधित लंबित एवं सुलह योग्य मामलों को भी राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक से अधिक संख्या में लाने पर चर्चा हुई। बैंक अधिकारियों को ऐसे मामलों की पहचान कर संबंधित ऋणधारकों एवं पक्षकारों से संपर्क करने तथा उन्हें लोक अदालत की प्रक्रिया और संभावित समाधान के बारे में जानकारी देने को कहा गया।
अध्यक्ष ने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से आपसी सहमति से मामलों का समाधान होने पर दोनों पक्षों को राहत मिलती है। इसलिए सभी विभागों और बैंक अधिकारियों को इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाते हुए लंबित मामलों के निष्पादन की दिशा में पहल करनी चाहिए।
बैठक में उपस्थित सभी पदाधिकारियों ने राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन के लिए अनुमंडलीय विधिक सेवा समिति को हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन दिया। अधिकारियों ने अपने-अपने विभाग से संबंधित मामलों को चिह्नित कर निर्धारित प्रक्रिया के तहत राष्ट्रीय लोक अदालत में प्रस्तुत कराने की बात कही। समिति की ओर से भी संबंधित विभागों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया गया।
