न्यूज 11 भारत / पटना डेस्क : बिहार के पहले परमाणु बिजली घर की राह में आ रही बड़ी अड़न अब खत्म हो चुकी है। इस अड़चन को जल संसाधन विभाग ने खत्म किया है। बांका परमाणु बिजली घर के लिए सबसे जरूरी पानी का इंतजाम जल संसाधन विभाग ने कर दिया है। इसे बदुआ जलाशय से हर साल आठ करोड़ घनमीटर (80 एमसीएम-मिलियन क्यूबिक मीटर) पानी की आपूर्ति होगी। बदुआ से पानी देने का अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करते हुए बिहार स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी के प्रबंध निदेशक को जानकारी दे दी गई है।
बांका में होगा दो इकाइयों का निर्माण
बांका के भितिया ग्राम में एनटीपीसी की ओर से 700 मेगावाट की दो इकाइयों (1400 मेगावाट) का निर्माण होना है। सिंचाई सृजन भागलपुर के मुख्य अभियंता ने बदुआ जलाशय से पानी के उपयोग को लेकर प्रस्ताव मुख्यालय को भेजा। इसी के आलोक में जल संसाधन विभाग ने अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया है।
छह महीने में तैयार होगा डीपीआर
एनटीपीसी ने परियोजना की मंजूरी के लिए एटॉमिक इनर्जी कॉरपोरेशन को प्रस्ताव भेज दिया है। छह महीने में डीपीआर तैयार हो जाएगी। राज्य सरकार का प्रयास है कि 20 नवम्बर को जब एनडीए सरकार के एक साल पूरा हो तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों इस परियोजना का भी शिलान्यास करा दिया जाए।
बदुआ जलाशय में आएगा गंगा का पानी
बदुआ जलाशय में उपलब्ध पानी से परमाणु बिजली घर को सालों भर पानी नहीं मिल सकता। इसलिए जल संसाधन विभाग पाइपलाइन के सहारे गंगा के पानी को जलाशय तक लाएगा। इसके लिए सुल्तानगंज में एक इनटेक बनेगा। तारापुर में एक कंट्रोल रूम भी बनेगा।
क्या होंगे फायदे
बांका में प्रस्तावित 700 मेगावाट का परमाणु केंद्र वहां विकास का जो ताना-बाना बुनेगा, बुलंदशहर का नरौरा परमाणु केंद्र इसका उदाहरण है। 1970 के दशक में शुरू हुए इस केंद्र की पहली इकाई ने 1 जनवरी 1991 और दूसरी ने 1 जुलाई 1992 से परिचालन शुरू किया था। इसने समूचे क्षेत्र में ढांचागत विकास और रोजगार की नई इबारत लिखी है।
