बिहार में सरकारी शिक्षकों के वेतन भुगतान में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है।
न्यूज11 भारत/बिहार डेस्क: बिहार में सरकारी शिक्षकों के वेतन भुगतान में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। शिक्षा विभाग के आंतरिक ऑडिट में नवादा, भागलपुर और पटना में करीब 1.85 करोड़ रुपये के संदिग्ध भुगतान का खुलासा हुआ है। कहीं 46 हजार रुपये के स्वीकृत वेतन पर लाखों रुपये का भुगतान किया गया, तो कहीं काल्पनिक शिक्षकों के नाम पर सरकारी खजाने से राशि निकालने के आरोप लगे हैं। मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। अब राज्य के सभी 38 जिलों में वेतन भुगतान का ऑडिट कराया जाएगा।
मामले में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के साथ विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। जांच के केंद्र में मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (HRMS) पोर्टल है। आशंका है कि पोर्टल की लॉगिन आईडी का दुरुपयोग कर वेतन रिकॉर्ड में बदलाव और अनधिकृत भुगतान किए गए।
नवंबर के मध्य तक पूरी होगी 38 जिलों की जांच
बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने सभी 38 जिलों में आंतरिक ऑडिट कराने की पुष्टि की है। उन्होंने अधिकारियों को नवंबर के मध्य तक जांच पूरी करने का निर्देश दिया है। साथ ही HRMS प्रणाली में किसी भी तरह की हेराफेरी रोकने के लिए विशेषज्ञों की मदद लेने की बात कही है।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि शुरुआती तीन मामलों के अध्ययन में गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था को और बेहतर बनाने की जरूरत है। भ्रष्टाचार में शामिल शिक्षकों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।
भागलपुर में फर्जी शिक्षकों के नाम पर करोड़ों के भुगतान का मामला
भागलपुर में HRMS पोर्टल के जरिए अनधिकृत भुगतान के दो मामले सामने आए हैं। पहले मामले में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी शशि चंदन चौधरी के खिलाफ 8 अक्टूबर 2026 को जोगसर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। आरोप है कि पोर्टल के जरिए एक काल्पनिक शिक्षक के नाम पर सरकारी राशि का भुगतान किया गया। इस मामले में उन्हें अगले दिन गिरफ्तार कर लिया गया।
वहीं, दूसरे मामले में तनुश्री नाम की काल्पनिक शिक्षिका के नाम पर कई महीनों तक भुगतान किए जाने का आरोप है। इस मामले में 98,12,773 रुपये की अनियमितता का उल्लेख किया गया है। जिला शिक्षा पदाधिकारी के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की गई है।
नवादा में 46 हजार के वेतन पर 10 लाख से ज्यादा का भुगतान
नवादा में वेतन और भत्तों में हेराफेरी का मामला सामने आया है। यहां रजौली के बेलाडीह स्थित प्राथमिक विद्यालय की एक शिक्षिका और HRMS पोर्टल पर मेकर व चेकर की भूमिका निभाने वाले दो कर्मचारियों को आरोपी बनाया गया है।
प्राथमिकी के मुताबिक, अप्रैल 2025 में शिक्षिका का मासिक वेतन 46,772 रुपये स्वीकृत था। आरोप है कि पोर्टल पर अन्य भत्तों के नाम पर 4,52,222 रुपये की अनधिकृत राशि जोड़ दी गई। इससे अप्रैल महीने का कुल भुगतान बढ़कर 4,91,772 रुपये हो गया।
मई 2025 में भी शिक्षिका का वेतन 46,772 रुपये निर्धारित था, लेकिन आरोप है कि उन्हें 3,49,500 रुपये का भुगतान किया गया। जांच में समग्र शिक्षा निधि से उनके खाते में 2,86,000 रुपये भेजे जाने का भी उल्लेख है। प्राथमिकी के अनुसार, शिक्षिका को कुल 10,43,950 रुपये का कथित अनधिकृत भुगतान किया गया।
जांचकर्ताओं ने शिक्षिका के बैंक खाते से 20 मई 2025 को सतीश कुमार नाम के व्यक्ति के खाते में एक लाख रुपये ट्रांसफर किए जाने का भी उल्लेख किया है। संदेह जताया गया है कि संबंधित व्यक्ति भुगतान प्रक्रिया में चेकर की भूमिका निभाने वाला प्रधान लिपिक हो सकता है। हालांकि, उसकी पहचान और कथित संबंध की पुष्टि होना बाकी है। मामले में भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है।
पटना में मेकर लॉगिन आईडी का दुरुपयोग, लिपिक निलंबित
पटना में भी सरकारी राशि के भुगतान में अनियमितता का मामला सामने आया है। 14 अक्टूबर 2026 को जिला शिक्षा पदाधिकारी योगेश कुमार ने गुलजारबाग स्थित एफएनएस अकादमी के लिपिक विजय कुमार विद्यार्थी को निलंबित कर दिया।
निलंबन आदेश के अनुसार, उन पर सरकारी और विभागीय निधि से संबंधित 76,71,983 रुपये की वित्तीय अनियमितता में शामिल होने का आरोप है। आरोप है कि उन्होंने जिला शिक्षा पदाधिकारी की आधिकारिक मेकर लॉगिन आईडी का इस्तेमाल कर HRMS पोर्टल पर अनधिकृत प्रविष्टियां कीं और निर्धारित राशि से अधिक भुगतान तैयार किया।
मामले में धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और आपराधिक विश्वासघात जैसे आरोपों का उल्लेख है। निलंबन के बाद उनका मुख्यालय घोषवरी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी का कार्यालय निर्धारित किया गया है। उनके खिलाफ विभागीय जांच और आरोपपत्र तैयार करने की प्रक्रिया भी जारी है।
HRMS पोर्टल की निगरानी पर उठे सवाल
नवादा, भागलपुर और पटना में सामने आए मामलों ने शिक्षा विभाग की ऑनलाइन वेतन भुगतान व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। तीनों जिलों में पोर्टल पर अनधिकृत प्रविष्टियों, वेतन रिकॉर्ड में बदलाव और संदिग्ध भुगतान के आरोप सामने आए हैं।
अब विभाग का फोकस सभी 38 जिलों में वेतन भुगतान की जांच करने और संदिग्ध लेनदेन की पहचान करने पर है। ऑडिट के जरिए यह भी पता लगाया जाएगा कि इस पूरे मामले में किन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका रही है।
फिलहाल, संबंधित मामलों में लगाए गए आरोप जांच के अधीन हैं। नवंबर के मध्य तक ऑडिट पूरा होने के बाद ही बिहार में शिक्षक वेतन भुगतान की अनियमितताओं की पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।
