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बिहार में सरकार से नाराज राज्यपाल, कहा- बिना मेरी अनुमति अफसर-कर्माचारियों का तबादला ना करें


न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
अस्मित सिन्हा / पटना:
बिहार के राज्यपाल ने राज्य सरकार पर गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि बिना बताए लोकभवन में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों का ट्रांसफर या पोस्टिंग ना की जाए। ट्रांसफर का आदेश जारी करने से पहले राज्यपाल को सूचना देना जरूरी है। 

बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने सरकार से नाराजगी जाहिर की है। लोकभवन में तैनात अधिकारी और कर्मचारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग पर राज्यपाल ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने बिहार सरकार से दो-टूक कहा कि बिना बताए लोकभवन में तैनात किसी भी अधिकारी या कर्मचारी का तबादला ना किया जाए। इस संबंध में राज्यपाल ने राज्य सरकार को पत्र जारी किया है। इसमें सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए गए है कि बिना राज्यपाल को पूर्व सूचना दिए लोकभवन में किसी का ट्रांसफर या नई पोस्टिंग ना की जाए।

राज्यपाल सचिवालय की ओर से जारी कार्यालय आदेश में कहा गया है कि संज्ञान में आया है कि लोक भवन में पदस्थापित कुछ अधिकारियों-कर्मचारियों का तबादला बाहर (अन्य सरकारी विभागों में) किया जा रहा है। साथ ही नए अधिकारियों एवं कर्मचारियों का लोकभवन में पदस्थापन किया जा रहा है। ऐसे किसी भी आदेश को लागू करने से पहले संबंधित प्रस्ताव को उचित तरीके से राज्यपाल के संज्ञान में अनिवार्य रूप से लाना होगा।

राज्यपाल ने किन-किन अधिकारियों एवं कर्मचारियों की ट्रांसफर एवं पोस्टिंग पर आपत्ति जताई है, इस पर विस्तृत जानकारी फिलहाल सामने नहीं आ पाई है। हालांकि, बताया जा रहा है कि हाल के महीनों में लोकभवन में तैनात अलग-अलग सेवाओं के कर्मचारी एवं अधिकारियों का फेरबदल किया गया है।

रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन बीते मार्च महीने में बिहार के राज्यपाल बनाए गए थे। उन्होंने 14 मार्च 2026 को बिहार के 43वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली थी। पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई थी। हसनैन भारतीय सेना से रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल हैं। उन्होंने लगभग चार दशक तक सेना में कई अहम पदों पर अपनी सेवाएं दीं। उनसे पहले आरिफ मोहम्मद खान लगभग 15 महीने तक बिहार के राज्यपाल रहे थे।

पटना स्थित राज्यपाल सचिवालय, लोकभवन से हाल के महीनों में विभिन्न सेवाओं के कई अधिकारियों का तबादला या पदस्थापन हो चुका है। सामान्य प्रशासन विभाग ने बीते 3 अगस्त को बिहार सचिवालय आशुलिपिक सेवा के अधिकारी BSSS संजय सिंह को लोकभवन में तैनात करने का आदेश जारी किया था।

पिछले महीने लोकभवन में तैनात प्रधान आप्त सचिव BSSS अधिकारी नीरू पाठक का ट्रांसफर कर दिया गया था। 8 जुलाई को उन्हें लोकभवन से बुलाकर मुख्य जांच आयुक्त निदेशालय में आप्त सचिव बनाया गया था। उसी दिन आशुलिपिक गोपाल कुमार को भी लोकभवन से बुलाकर मुख्य जांच आयुक्त निदेशालय में लगाया गया था।

बीते जून महीने में भी लोकभवन के कुछ अधिकारी इधर-उधर हुए थे। 18 जून को आशुलिपिक सेवा के दो अधिकारियों अंजु कुमारी और सत्यप्रकाश कुमार की राज्यपाल सचिवालय में तैनाती की गई थी। उन्हें मुख्य जांच आयुक्त निदेशालय से ट्रांसफर कर लोकभवन भेजा गया था।

इससे एक दिन पहले 17 जून को राज्यपाल सचिवालय में अपर सचिव रहे आईएएस नंदलाल आर्या का तबादला कर उन्हें बक्सर का बंदोबस्त पदाधिकारी बनाया गया था। वहीं, 1 जून को आईएएस संजय कुमार का ग्रामीण कार्य विभाग से तबादला कर उन्हें लोकभवन में अपर सचिव बनाकर भेजा गया था।

हालांकि, सामान्य प्रशासन विभाग के अधिसूचना पत्रों के अनुसार इनमें से अधिकतर अधिकारियों का तबादला एवं नियुक्तियां राज्यपाल की अनुमति से ही किया गया था। ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि बिना पूर्व सूचना के किन अधिकारियों या कर्मियों के तबादले से राज्यपाल नाराज हैं।
 



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