न्यूज 11 भारत/बिहार डेस्क
साकेत/पटना: राहुल गांधी द्वारा दलितों के साथ हो रहे भेदभाव पर चिंता जताने पर चिराग पासवान ने कहा कि यह चिंता उनकी सरकार के लिए भी है, लेकिन आजादी के बाद दशकों तक कांग्रेस की सरकार रही और वह समाज से भेदभाव मिटाने में असफल रही।
उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान में आरक्षण का आधार सामाजिक पिछड़ापन और छुआछूत है, न कि आर्थिक स्थिति। इसे आर्थिक दृष्टिकोण से देखना संविधान के खिलाफ है।
क्रीमी लेयर और वर्गीकरण का विरोध
एससी/एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर और उप-वर्गीकरण (सब-क्लासिफिकेशन) का कड़ा विरोध करते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई बदलाव करना है तो पहले संसद में संविधान संशोधन की बात करें।
जीतन राम मांझी का नाम लेते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग क्रीमी लेयर का समर्थन करते हैं, उन्हें खुद और अपने परिजनों के संवैधानिक पदों से इस्तीफा देकर मिसाल पेश करनी चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि आज भी दलित दूल्हों को घोड़ी पर चढ़ने से रोका जाता है और पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद तक को मंदिर प्रवेश में भेदभाव का सामना करना पड़ा था।
चिराग ने कहा कि दलित समाज की ताकत उसकी एकता में है। दलित और महादलित में बांटने या उप-वर्गीकरण करने से समाज कमजोर होगा और नुकसान सिर्फ शोषित वर्ग का होगा।
