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न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क 

राहुल कुमार / शेरघाटी –   गया जिले में शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने और छात्रों के सीखने के स्तर को मजबूत बनाने के उद्देश्य से सोमवार को शेरघाटी के राजकीय मध्य विद्यालय योगापुर में जिला स्तरीय योजना निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जिला शिक्षा पदाधिकारी गया के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ, जिसमें जिले के विभिन्न प्रखंडों से पहुंचे प्रधानाध्यापक, शिक्षक, शिक्षा विभाग के अधिकारी एवं कार्यक्रम से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यशाला में “परख” लक्ष्यों को सफल बनाकर गया को प्रेरक जिला बनाने की दिशा में विस्तृत चर्चा की गई। अधिकारियों ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा परिणाम बेहतर करना नहीं, बल्कि बच्चों में तार्किक सोच, व्यवहारिक ज्ञान और सीखने की वास्तविक क्षमता विकसित करना है। इसके लिए आधुनिक एवं प्रभावी शिक्षण व्यवस्था को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।

हाईलाइट्स – 

  • योगापुर में “परख” लक्ष्यों को लेकर जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित
  • गया को प्रेरक जिला बनाने के लिए शिक्षा सुधार पर मंथन
  • गतिविधि आधारित शिक्षण और डिजिटल शिक्षा पर विशेष जोर
  • कमजोर छात्रों के लिए विशेष मॉनिटरिंग और अतिरिक्त कक्षाओं की योजना
  • शिक्षकों, अभिभावकों और प्रशासन के बेहतर समन्वय पर बल

गतिविधि आधारित शिक्षा और डिजिटल संसाधनों पर जोर

कार्यशाला में वक्ताओं ने कहा कि “परख” योजना शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके तहत विद्यालयों में बच्चों के सीखने के स्तर का नियमित मूल्यांकन किया जाएगा और उसके आधार पर सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। जिला कार्यक्रम लीड हर्षिद अवस्थी ने बताया कि प्रत्येक विद्यालय को बच्चों की शैक्षणिक स्थिति का विश्लेषण कर विशेष रणनीति तैयार करनी होगी। वहीं जिला कार्यक्रम लीड शुभम कुमार सिंह ने शिक्षकों को नई शिक्षण तकनीकों, डिजिटल संसाधनों और आधुनिक मूल्यांकन प्रणाली की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अब केवल किताब आधारित पढ़ाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि बच्चों में रचनात्मक सोच, संवाद क्षमता और समस्या समाधान कौशल विकसित करना समय की जरूरत बन चुका है। इसके लिए स्मार्ट क्लास, डिजिटल कंटेंट और गतिविधि आधारित शिक्षण को बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है।

सामूहिक प्रयास से गया को बनाया जाएगा मॉडल जिला

कार्यक्रम के दौरान बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने, विद्यालय छोड़ने वाले छात्रों की संख्या कम करने, बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान मजबूत करने और विज्ञान-गणित के प्रति छात्रों की रुचि बढ़ाने जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। राजकीय मध्य विद्यालय योगापुर के प्रधानाध्यापक दिग्विजय कुमार सिंह ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए शिक्षक, अभिभावक और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। अधिकारियों ने ग्रामीण क्षेत्रों में संसाधनों की कमी, डिजिटल शिक्षा तक सीमित पहुंच और छात्रों की अनियमित उपस्थिति जैसी चुनौतियों को दूर करने के लिए विशेष योजना बनाने की बात कही। कार्यशाला के अंत में सभी शिक्षकों और अधिकारियों ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि “परख” के लक्ष्यों को सफल बनाकर गया जिले को शिक्षा के क्षेत्र में एक मॉडल एवं प्रेरक जिला बनाया जाएगा।

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