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अगले 5 साल में मिलेंगे 70 पर्यटन स्थल, कैमूर बनेगा दूसरा टाइगर रिजर्व!


न्यूज 11 भारत / पटना डेस्क : बिहार सरकार ने इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए 50 से अधिक नए स्पॉट्स चिन्हित किए हैं। अगले पांच सालों में राज्य में इको-टूरिज्म स्थलों की संख्या बढ़कर 60-70 पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। बिहार के प्रमुख इको-टूरिज्म स्थलों में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये राज्य का एकमात्र टाइगर रिजर्व है। यह तराई के घने जंगलों, बाघों, हाथियों और अन्य वन्यजीवों के लिए प्रसिद्ध है। नेपाल की सीमा से सटा होने के कारण बड़ी संख्‍या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं।

कैमूर बनेगा बिहार का दूसरा टाइगर र‍िजर्व

इसके अलावा कैमूर को दूसरे टाइगर र‍िजर्व के रूप में विकसित क‍िया जा रहा है। इसे झरनों और ट्रैकिंग के लिए जाना जाता है। भीमबांध वन्यजीव सैंक्चुअरी, गौतम बुद्ध वन्यजीव सैंक्चुअरी, विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन सैंक्चुअरी, कांवर झील पक्षी सैंक्चुअरी, राजगीर का पहाड़ी क्षेत्र, ककोलत वॉटरफल, घोड़ा कटोरा, बराबर-गुरुपा पहाड़ियां और सूरजपुर वेटलैंड भी राज्य के प्रमुख इको-टूरिज्म स्थलों में शामिल हैं।

20 लाख नए रोजगार का लक्ष्य 

पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने बताया कि बिहार इको-टूरिज्म के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार का लक्ष्य स्थाई पर्यटन को बढ़ावा देना है, ताकि स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सके। पर्यटन विभाग ने अगले पांच वर्षों में पर्यटन क्षेत्र के माध्यम से 20 लाख रोजगार सृजित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इन प्रयासों से न सिर्फ देश-विदेश के पर्यटक आकर्षित होंगे, बल्कि बिहार की प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर की भी रक्षा होगी।

वाल्मीकिनगर में बनेगा आइकॉनिक टूरिज्म पार्क 

सहरसा स्थित मत्स्यगंधा झील पर सॉवेनियर शॉप, सुपर ट्री, ग्लास ब्रिज और एक्सपीरियंस सेंटर समेत अन्य सुविधाएं साल 2026 तक पूरी कर ली जाएंगी। पश्चिम चंपारण के लव कुश पार्क और वाल्मीकिनगर में आइकॉनिक टूरिज्म पार्क का व्यापक विकास कार्य 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इसके अलावा मां मुंडेश्वरी धाम में धर्मशाला का अधिक से अधिक उपयोग सुनिश्चित करने के लिए जंगल सफारी और इको-टूरिज्म गतिविधियों को विशेष बढ़ावा दिया जाएगा।

आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे पर्यटन स्थल

पर्यटकों को बेहतर अनुभव देने के लिए विकसित किए जा रहे सभी इको-टूरिज्म स्थलों पर नेचर ट्रेल्स, वॉच टावर, इको-कॉटेज, होमस्टे, डिजिटल साइनेज और इंटरप्रिटेशन सेंटर जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएगी हैं। बिहार में वर्तमान में 10 से 15 सक्रिय इको-टूरिज्म स्थल हैं, जबकि 24 से अधिक प्रमुख स्थलों को विकसित करने का काम तेजी से चल रहा है। इनमें वन्यजीव अभयारण्य, राष्ट्रीय उद्यान, झीलें, वॉटरफाॅल और पहाड़ियां शामिल हैं।



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