न्यूज 11 भारत / पटना डेस्क : लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) के प्रमुख तेज प्रताप यादव की मुश्किलें बढ़ गई हैं। गिरफ्तारी के बाद पटना पुलिस ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में बेउर जेल भेज दिया है। पुलिस ने उन्हें शनिवार को सिटी सेंटर मॉल से हिरासत में लिया था। सुरक्षा कारणों और समर्थकों की भीड़ को रोकने के लिए पुलिस उन्हें दीघा, दानापुर और नौबतपुर जैसे कई थानों में घुमाती रही। इसके बाद देर रात कड़ी सुरक्षा के बीच उन्हें कोर्ट में पेश किया गया। जहां से उन्हें सीधे बेउर जेल भेज दिया गया। अगर तेज प्रताप यादव पर लगे आरोप साबित होते हैं तो उन्हें लंबे समय के लिए जेल की हवा खानी पड़ सकती है।
बता दें कि पूरी कार्रवाई ‘बिहार बंद’ के दौरान हुए हंगामे से जुड़ी है। NEET पेपर लीक, केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और लाठीचार्ज के विरोध में शनिवार को यह बंद बुलाया गया था। तेज प्रताप यादव ने इस प्रदर्शन का खुलकर समर्थन किया था। शनिवार सुबह वे गांधी मैदान के गेट नंबर-10 पर एक प्रतिमा पर चढ़कर प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे।
दिनभर चले इस प्रदर्शन के दौरान माहौल अचानक बिगड़ गया। उग्र भीड़ और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई और जमकर पथराव हुआ। इस हिंसा में गांधी मैदान थानाध्यक्ष अखिलेश मिश्रा और टीओपी प्रभारी प्रमोद कुमार समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस का आरोप है कि तेज प्रताप ने कानून-व्यवस्था बिगाड़ी और अपने समर्थकों को हिंसा के लिए उकसाया।
जानकारी के अनुसार, तेज प्रताप यादव के खिलाफ पुलिस ने गांधी मैदान थाने में BNS की धारा 109 के तहत ‘हत्या के प्रयास’ का मामला दर्ज किया है। तेज प्रताप यादव को फिलहाल जमानत मिल सकती है लेकिन अगर अदालत में उनके खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला साबित होता तो उन्हें लंबे समय तक जेल में रहना पड़ सकता है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109 के तहत हत्या के प्रयास में दोषी को 10 साल तक की जेल और जुर्माने की सजा हो सकती है। अगर हमले में पीड़ित को गंभीर चोट पहुंचती है, तो अदालत उम्रकैद की सजी भी सुना सकती है।
