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बिहार में सड़क बनी ‘धान का खेत’, गुस्से में ग्रामीणों का अनोखा प्रदर्शन


न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
रमण कुमार मधेपुरा / मधेपुरा:
मधेपुरा में सड़क की बदहाली से परेशान ग्रामीणों का गुस्सा अब सड़क पर दिखाई देने लगा है। भर्राही बाजार से जीवछपुर फोरलेन तक जाने वाली मुख्य सड़क पर ग्रामीणों ने धान रोपकर अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क में इतने गड्ढे हैं और बारिश के बाद इतना पानी जमा हो जाता है कि सड़क और खेत में फर्क करना मुश्किल हो जाता है।

मामला मधेपुरा प्रखंड की मदनपुर पंचायत का है। यहां भर्राही बाजार से जीवछपुर फोरलेन को जोड़ने वाली सड़क लंबे समय से जर्जर हालत में है। सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे हैं। बारिश होते ही इन गड्ढों में पानी भर जाता है और राहगीरों के लिए रास्ता जानलेवा बन जाता है।

ग्रामीणों ने सड़क की हालत को लेकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ नाराजगी जताते हुए सड़क पर ही धान की रोपाई कर दी। ग्रामीणों का कहना है कि जब सड़क खेत बन चुकी है, तो फिर खेत की तरह इसमें धान ही क्यों न रोपा जाए। प्रदर्शन के जरिए ग्रामीणों ने जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान सड़क की बदहाली की ओर खींचने की कोशिश की।

ग्रामीणों के मुताबिक इस सड़क से रोजाना बड़ी संख्या में लोग आवागमन करते हैं। किसान अपने खेतों तक पहुंचते हैं, राहगीर मुख्य सड़क तक जाते हैं और स्कूली बच्चे भी इसी रास्ते से स्कूल पहुंचते हैं। लेकिन सड़क पर जलजमाव और गड्ढों के कारण आए दिन दुर्घटना का खतरा बना रहता है।

सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को उठानी पड़ रही है। बारिश के दिनों में कई बच्चे समय पर स्कूल नहीं पहुंच पाते। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क की समस्या को लेकर कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण या मरम्मत को लेकर जिलाधिकारी, आरडब्ल्यूडी विभाग, सांसद और विधायक को लिखित आवेदन तक दिया जा चुका है। इसके बावजूद सड़क की तस्वीर नहीं बदली। लिहाजा अब ग्रामीणों ने आंदोलन को और तेज करने का फैसला किया है।

ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर एक महीने के भीतर सड़क निर्माण या मरम्मत का काम शुरू नहीं हुआ, तो चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। जरूरत पड़ी तो ग्रामीण भूख हड़ताल पर भी बैठेंगे।

अब ग्रामीणों की मांग सीधी है,सड़क की तत्काल जांच हो, जर्जर हिस्सों की मरम्मत कराई जाए और स्थायी निर्माण कराया जाए। ताकि लोगों को गड्ढों, कीचड़ और जलजमाव से राहत मिल सके।

भर्राही से जीवछपुर तक की यह सड़क फिलहाल सिर्फ आवागमन का रास्ता नहीं, बल्कि ग्रामीणों के आक्रोश की आवाज बन चुकी है। सड़क पर रोपा गया धान प्रशासन के लिए एक सवाल है।जब सड़क खेत बन जाए, तो विकास का रास्ता आखिर कहां से निकलेगा?



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