न्यूज 11 भारत / बिहार डेस्क
नमो नारायण मिश्र / गोपालगंज – बिहार की राजनीति से जुड़ी एक बड़ी खबर गोपालगंज से सामने आई है। कुचायकोट विधानसभा क्षेत्र से जेडीयू विधायक अमरेन्द्र कुमार पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। बेलवा गांव में 16 एकड़ जमीन पर कथित अवैध कब्जे और धमकी देने के मामले की जांच अब अपराध अनुसंधान विभाग (CID) करेगा। बिहार सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी सीआईडी को सौंप दी है। इसके साथ ही संबंधित केस डायरी और अन्य सभी दस्तावेज भी सीआईडी को हस्तांतरित किए जा रहे हैं। इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और पूरे मामले पर लोगों की नजरें टिक गई हैं।
हाईलाइट्स –
- जेडीयू विधायक अमरेन्द्र उर्फ पप्पू पांडेय से जुड़े 16 एकड़ जमीन विवाद की जांच अब CID करेगी।
- बेलवा गांव की जमीन पर अवैध कब्जे और धमकी देने के आरोप में सात लोग नामजद हैं।
- बिहार सरकार ने केस डायरी और सभी दस्तावेज CID को ट्रांसफर करने का आदेश दिया।
- विधायक को पहले सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल चुकी है, लेकिन जांच जारी रहेगी।
- CID की एंट्री के बाद बिहार की राजनीति में मामला फिर चर्चा का विषय बन गया है।
विधायक समेत सात लोगों पर गंभीर आरोप
शिकायत के अनुसार बेलवा गांव की विवादित जमीन पर जबरन कब्जा करने की कोशिश की गई थी। इस मामले में विधायक पप्पू पांडेय, उनके बड़े भाई सतीश पांडेय समेत कुल सात लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि जमीन पर कब्जा करने के लिए दबाव बनाया गया और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी गई। एफआईआर में भूमि कब्जा, धमकी, दबाव बनाने और संगठित अपराध से जुड़ी कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपियों की ओर से एमपी-एमएलए कोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी भी दाखिल की गई थी। इस केस में राज्यसभा सांसद और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन मिश्रा पैरवी कर रहे थे।
CID जांच से राजनीतिक माहौल गरमाया, रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
सरकार द्वारा जांच सीआईडी को सौंपे जाने के बाद इस मामले की संवेदनशीलता और बढ़ गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मोकामा से जुड़े चर्चित मामलों के बाद अब पप्पू पांडेय से जुड़े जमीन विवाद में सीआईडी की एंट्री ने बिहार की राजनीति को नया मुद्दा दे दिया है। हालांकि विधायक को पहले सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल चुकी है, लेकिन अब जांच एजेंसी की कार्रवाई और रिपोर्ट पर सबकी नजरें टिकी हैं। माना जा रहा है कि सीआईडी की जांच में कई नए तथ्य सामने आ सकते हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि जांच विधायक के खिलाफ नए सबूत पेश करती है या उन्हें राहत मिलती है। फिलहाल पूरे मामले का सच सीआईडी की जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
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