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उग्र विरोध के बीच पुलिस का लाठीचार्ज, अफरा-तफरी का माहौल



सूर्यगढ़ा बाजार में अतिरिक्त पुलिस बल और स्थानीय पुलिस की मौजूदगी में जेसीबी (बुलडोजर) के जरिए सड़क किनारे किए गए अवैध अतिक्रमण को ध्वस्त किया गया। 

न्यूज11 भारत/बिहार डेस्क 
सरफराज आलम/लखीसराय:
सूर्यगढ़ा नगर परिषद स्थित व्यस्त सूर्यगढ़ा बाजार में प्रशासन का चाबुक चला। अतिरिक्त पुलिस बल और स्थानीय पुलिस की मौजूदगी में जेसीबी (बुलडोजर) के जरिए सड़क किनारे किए गए अवैध अतिक्रमण को ध्वस्त किया गया। कार्रवाई के दौरान दुकानों व मकानों के आगे बने शेड, टीन-चदरे के ढांचे और सड़क तक निकली सीढ़ियों को जमींदोज कर दिया गया।

हालांकि, इस दौरान प्रशासन को स्थानीय दुकानदारों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। स्थिति तनावपूर्ण होते देख पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज कर दिया, जिससे बाजार में काफी देर तक अफरा-तफरी मची रही।

विरोध के बीच लाठीचार्ज, बैकफुट पर आए प्रदर्शनकारी

अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू होते ही सैकड़ों की संख्या में स्थानीय व्यवसायी, रेहड़ी-पटरी वाले और ग्रामीण मौके पर जमा हो गए। जब बुलडोजर दुकानों के आगे बढ़ा, तो कई दुकानदारों ने इसका पुरजोर विरोध किया। देखते ही देखते माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया।

भीड़ को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने हल्का बल प्रयोग करते हुए लाठीचार्ज कर दिया। लाठी भांजते ही मौके पर भगदड़ मच गई। पुलिस द्वारा भीड़ को खदेड़ने के बाद प्रशासन ने दोबारा अतिक्रमण रोधी अभियान शुरू किया। कार्रवाई को आगे बढ़ता देख कई व्यवसायी खुद ही अपना सामान समेटते नजर आए।

“उजाड़ने से पहले बसाए सरकार” – पीड़ित व्यवसायियों का दर्द

कार्रवाई से प्रभावित छोटे दुकानदारों और फुटपाथ विक्रेताओं में भारी आक्रोश देखा गया। व्यवसायियों ने न केवल प्रशासनिक रवैये पर सवाल उठाए, बल्कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों के प्रति भी कड़ी नाराजगी जताई।

रोजी-रोटी का संकट: दुकानदारों का कहना है कि वे वर्षों से यहाँ व्यापार कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के इस तरह की कार्रवाई से उनके सामने भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी।

पक्षपात का आरोप:

कई छोटे व्यवसायियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन केवल गरीब और पटरी दुकानदारों को निशाना बना रहा है, जबकि बड़े और प्रभावशील रसूखदारों के स्थाई अतिक्रमण पर नरमी बरती जा रही है।

अस्पष्टता पर सवाल:

दुकानदारों ने मांग की कि सड़क के मध्य से कितनी दूरी तक अतिक्रमण हटाया जाना है, इसका स्पष्ट सीमांकन होना चाहिए।
“नगर बसाने के बजाय उजाड़ने की कार्रवाई की जा रही है। हम अतिक्रमण हटाने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन कार्रवाई निष्पक्ष और मानक के अनुसार होनी चाहिए।”— पीड़ित व्यवसायी

माइकिंग और सूचना पर बंटे दावे

कार्रवाई से पूर्व सूचना देने को लेकर दुकानदारों के दो पक्ष सामने आए। कुछ व्यवसायियों का कहना था कि प्रशासन द्वारा पूर्व में माइकिंग कराई गई थी, जबकि अधिकांश छोटे दुकानदारों ने दावा किया कि उन्हें सामान हटाने या संभलने का पर्याप्त समय नहीं दिया गया।

मौके पर मजिस्ट्रेट व भारी पुलिस बल तैनात

विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थल पर मजिस्ट्रेट के साथ भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी। मौके पर मौजूद प्रतिनियुक्त मजिस्ट्रेट ने बताया कि अनुमंडल प्रशासन के आदेशानुसार यह कार्रवाई की जा रही है और उनकी मुख्य प्राथमिकता कानून-व्यवस्था को बहाल रखना है।

दूसरी ओर, कार्रवाई के दौरान स्थल पर मौजूद NHAI (राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) के अधिकारियों और कर्मचारियों से जब मीडिया ने जानकारी लेनी चाही, तो उन्होंने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया।

आम जनता को राहत की उम्मीद

सूर्यगढ़ा बाजार लंबे समय से भीषण जाम और अतिक्रमण की समस्या से जूझ रहा था। जहाँ इस कार्रवाई से आम राहगीरों और वाहन चालकों को यातायात सुगम होने की उम्मीद जगी है, वहीं दूसरी ओर बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के बेदखल हुए छोटे दुकानदारों के पुनर्वास का मुद्दा अब गरमाने लगा है।
 





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