न्यूज 11 भारत / पटना डेस्क : बिहार विधान परिषद के मॉनसून सत्र के आखिरी दिन सदन की कार्यवाही के दौरान जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता और विधान पार्षद नीरज कुमार ने नव-निर्वाचित विधान पार्षद पवन सिंह के सदन में अनुपस्थित रहने पर सवाल उठाया। नीरज कुमार ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सदन सर्वोच्च मंच है और किसी भी जनप्रतिनिधि को इसकी कार्यवाही में भाग लेना चाहिए। नीरज कुमार ने कहा कि “यह अच्छी बात नहीं है कि पवन सिंह सदन में नहीं आए। सदन सिर्फ पैसे उठाने की जगह नहीं है। सदन में आकर लोग सीखते हैं, जनता के मुद्दे उठाते हैं और लोकतंत्र को मजबूत करते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि विधान परिषद और विधानसभा जैसे सदनों में नए जनप्रतिनिधियों को अनुभव मिलता है। वरिष्ठ सदस्यों की बातों से सीखने और नियम-कायदों को समझने का अवसर मिलता है। ऐसे में किसी सदस्य का लगातार अनुपस्थित रहना उचित नहीं माना जा सकता। जेडीयू एमएलसी ने कहा कि जनता ने जिस भरोसे के साथ प्रतिनिधियों को चुना है, उस भरोसे पर खरा उतरना उनकी जिम्मेदारी है। सदन की कार्यवाही में भाग लेना हर जनप्रतिनिधि का दायित्व है। उन्होंने उम्मीद जताई कि पवन सिंह आगे नियमित रूप से सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेंगे।
हालांकि बिहार विधान परिषद के मानसून सत्र के अंतिम दिन बीजेपी एमएलसी पवन सिंह विधान परिषद पहुंचे। इस दौरान बीजेपी और जेडीयू के कई वरिष्ठ नेता भी उनके साथ मौजूद रहे। सदन पहुंचने के बाद पवन सिंह ने विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह से शिष्टाचार मुलाकात की।
नीरज कुमार ने तेजस्वी पर भी साधा निशाना
बिहार विधानमंडल के मानसून सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी पर जेडीयू के विधान पार्षद और मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पूरे मानसून सत्र में तेजस्वी यादव के “चक्षु दर्शन तक नहीं हुए” और यह विधानसभा तथा विधान परिषद जैसी लोकतांत्रिक संस्थाओं का अपमान है। नीरज कुमार ने तंज कसते हुए कहा, “सुना है तेजस्वी यादव अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध में मध्यस्थता करने गए हैं। आखिर वे हैं कहां?” उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष का दायित्व सदन में सरकार को घेरना और जनता के मुद्दे उठाना होता है, लेकिन तेजस्वी यादव सदन से पूरी तरह गायब रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि “तेजस्वी यादव सदन से वेतन और सुविधाएं लेते हैं, लेकिन सदन की कार्यवाही में शामिल नहीं होते। यह जनता के जनादेश और लोकतंत्र, दोनों का अपमान है।”
