न्यूज 11 भारत/बिहार डेस्क
रोहित/पटना: अब बिहार के प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी जन प्रतिनिधियों के फोन कॉल और पत्रों को ठंडे बस्ते में नहीं डाल सकेंगे। नौकरशाहों द्वारा विधायकों और सांसदों की लगातार हो रही उपेक्षा पर राज्य सरकार ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने राज्य के सभी प्रशासनिक और पुलिस अफसरों के लिए एक नया और सख्त फरमान जारी किया है।
इसके तहत यदि किसी अधिकारी से किसी विधायक या सांसद का फोन कॉल मिस हो जाता है, तो उसे अनिवार्य रूप से तुरंत ‘कॉल बैक’ करना होगा। सरकार का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधि जनता और शासन के बीच की सबसे मुख्य कड़ी हैं। इसलिए उनकी अनदेखी अब किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यह आदेश राज्य के सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रधान सचिवों, विभागाध्यक्षों, डीजीपी, प्रमंडलीय आयुक्तों और डीएम-एसपी को भेज दिया गया है। नए नियमों के अनुसार, अब जनप्रतिनिधियों के पत्रों की अनदेखी पर भी पूरी तरह शिकंजा कसा जाएगा। अब विधायकों और सांसदों से प्राप्त होने वाले पत्रों की तुरंत रसीद देनी होगी। सिर्फ इतना ही नहीं, उस पत्र पर किस स्तर पर क्या कार्रवाई की गई या मामला किस स्तर पर लंबित है, इसकी पूरी रिपोर्ट एक तय समय-सीमा के भीतर संबंधित विधायक को लिखित में देनी होगी। नियमों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ब्यूरोक्रेसी-प्रतिनिधियों में दूरी कम करने की कोशिश
लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की आवाज जन प्रतिनिधियों के जरिए ही सरकार तक पहुंचती है। अक्सर विधायकों की शिकायत रहती थी कि जनसमस्याओं संबंधी पत्रों को अफसर टाल देते हैं। नया आदेश अफसरों की इसी बेलगाम मनमानी और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी पर शिकंजा कसने की बड़ी कोशिश है। इससे न केवल उनका सम्मान बहाल होगा, बल्कि अधिकारी समय-सीमा के भीतर कार्रवाई कर सकेंगे।
