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सहरसा सदर अस्पताल में नवजात की खरीद-फरोख्त का मामला, परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप


न्यूज 11 भारत/बिहार डेस्क
इन्द्रदेव/सहरसा:
सदर अस्पताल सहरसा में नवजात शिशु की कथित खरीद-फरोख्त का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि प्रसव वार्ड में भर्ती महिलाओं को बहला-फुसलाकर नवजात बच्चों को खरीदने की कोशिश की जाती है। इस कथित कारोबार में अस्पताल के कुछ गार्ड, दलाल और आशा कार्यकर्ताओं की संलिप्तता का आरोप लगाया गया है। बताया जा रहा है कि नवजात की कीमत 50 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक लगाई जाती है और बच्चों को बाहर भेजे जाने की बात भी सामने आ रही है।

मंगलवार को उस समय अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई, जब सौर बाजार क्षेत्र की एक महिला ने नवजात शिशु को जन्म दिया। आरोप है कि प्रसव के बाद से ही अस्पताल के गार्ड समेत कुछ लोगों द्वारा महिला से बच्चे को खरीदने के लिए बातचीत शुरू कर दी गई। महिला को बच्चे के बदले अलग-अलग रकम की पेशकश की गई। किसी ने करीब 40 हजार तो किसी ने 50 हजार रुपये तक देने की बात कही।

मामले की जानकारी अस्पताल चौकी प्रभारी को मिलने पर महिला को समझाकर वापस वार्ड में भेज दिया गया। हालांकि, आरोप है कि अगले दिन फिर से गार्ड और आशा कार्यकर्ता द्वारा महिला को करीब 50 हजार रुपये का प्रलोभन देकर नवजात को लेने की कोशिश की गई।

इसी दौरान बगल में इलाजरत मरीज के परिजनों को जब इस कथित सौदेबाजी की जानकारी मिली तो उन्होंने तत्काल अस्पताल के गार्ड सुपरवाइजर संजीव कुमार को इसकी सूचना दी। सूचना मिलते ही सुपरवाइजर मौके पर पहुंचे और मामले को गंभीरता से लेते हुए अस्पताल प्रशासन को जानकारी दी। इसके बाद मामले की जांच शुरू की गई।

गार्ड सुपरवाइजर संजीव कुमार ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, अस्पताल में मौजूद मरीजों के परिजनों ने आरोप लगाया कि सदर अस्पताल में लंबे समय से दलालों का जमावड़ा रहता है और मरीजों को तरह-तरह के प्रलोभन दिए जाते हैं। उनका कहना है कि अस्पताल में पूर्व में भी बच्चा बदले जाने का मामला सामने आ चुका है, बावजूद इसके ऐसे मामलों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से कथित रूप से इस तरह की गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है।

मामले की सूचना सिविल सर्जन को भी दी गई है। फिलहाल संबंधित महिला ने अपने नवजात बच्चे को बेचने से साफ इनकार कर दिया है। अब जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि नवजात की खरीद-फरोख्त की कोशिश के पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे और उनके खिलाफ प्रशासन क्या कार्रवाई करता है।

मां की ममता को शर्मसार करने वाले इस गंभीर आरोप ने सदर अस्पताल की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब लोगों की नजर अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की जांच एवं कार्रवाई पर टिकी है।



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