Voice of Eastern India

साइबर ठगों पर बिहार पुलिस का बड़ा प्रहार, अब ‘CCSU’ करेगी अपराधियों का गेम ओवर


बिहार में पैर पसार रहे ऑनलाइन फ्रॉड और साइबर अपराधियों को जड़ से उखाड़ने के लिए पुलिस मुख्यालय ने एक अभूतपूर्व फैसला लिया है। राज्य में लगातार बढ़ती डिजिटल ठगी की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए एक बेहद आधुनिक और हाईटेक विंग का गठन किया गया है। इस विशेष दस्ते को साइबर क्राइम एंड सिक्योरिटी यूनिट’ (CCSU) नाम दिया गया है। पुलिस प्रशासन का दावा है कि यह नई यूनिट पूरे सूबे में एक्टिव साइबर क्रिमिनल्स पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखेगी और उनके खिलाफ त्वरित एक्शन लेगी।

EOU से नाता तोड़ बनी स्वतंत्र विंग

अब तक बिहार में साइबर अपराध से जुड़े मामलों की तफ्तीश ‘आर्थिक अपराध इकाई’ (EOU) के पाले में थी। हालांकि, अपराधियों के बदलते तौर-तरीकों और तकनीकी चालाकी को देखते हुए अब इस व्यवस्था को बदल दिया गया है। पुलिस मुख्यालय ने साइबर यूनिट को EOU से अलग करके एक पूरी तरह स्वतंत्र विंग के रूप में स्थापित कर दिया है। यह नई नवेली सीसीएसयू (CCSU) अब सीधे पुलिस मुख्यालय के दिशानिर्देशों और निगरानी में काम करेगी।

118 टेक-सैवी जांबाजों की ‘स्पेशल फोर्स’

इस बेहद खास और हाईटेक यूनिट को जमीन पर उतारने के लिए 118 चुनिंदा पुलिस अधिकारियों और जवानों की फौज तैयार की गई है। इस टीम में 53 अधिकारी और 65 जवान मोर्चा संभालेंगे। अगर अधिकारियों के ढांचे को समझें, तो इसमें 7 इंस्पेक्टर, 42 सब-इंस्पेक्टर और 4 सार्जेंट को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनके साथ ही विभिन्न जिलों से छांटे गए उन जवानों को जोड़ा गया है जो तकनीकी जांच और फील्ड ऑपरेशन्स में माहिर हैं।

गैजेट्स और एडवांस सॉफ्टवेयर से लैस होंगे अफसर

इस यूनिट में शामिल होने का पैमाना सिर्फ वर्दी नहीं, बल्कि तकनीकी समझ को बनाया गया है। मुख्यालय के मुताबिक, सीसीएसयू में केवल उन्हीं कर्मियों को जगह मिली है जो साइबर ट्रेनिंग में अव्वल रहे हैं और जिनकी डिजिटल समझ मजबूत है। इस टीम को अपराधियों से दो कदम आगे रखने के लिए आधुनिकतम तकनीकों और एडवांस सॉफ्टवेयर से लैस किया जा रहा है, ताकि डिजिटल लुटेरों को पलक झपकते ही दबोचा जा सके।

सात समंदर पार भी रहेगी नजर: इंटरपोल और अन्य राज्यों से तालमेल

साइबर क्राइम की कोई सीमा नहीं होती, इसी बात को ध्यान में रखकर सीसीएसयू की रणनीति बनाई गई है। चूंकि कई गिरोहों के तार दूसरे राज्यों और विदेशी सरजमीं से जुड़े होते हैं, इसलिए यह नई यूनिट अंतरराज्यीय पुलिस और अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों के साथ मिलकर एक मजबूत नेटवर्क तैयार करेगी। इससे देश या विदेश के किसी भी कोने में बैठे ठगों की पहचान करना और उन्हें सलाखों के पीछे पहुंचाना बेहद आसान हो जाएगा।

बढ़ता खतरा और पुलिस का मास्टरस्ट्रोक

पिछले कुछ समय में बिहार के भीतर फर्जी कॉल, बैंक फ्रॉड, ओटीपी स्कैम, सोशल मीडिया हैकिंग और ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी नई तरह की ठगी के मामलों में बाढ़ सी आ गई है। कई मासूम लोग अपनी गाढ़ी कमाई इन अपराधियों के चक्कर में गंवा चुके हैं। इसी गंभीर स्थिति को भांपते हुए सरकार ने इस मास्टरस्ट्रोक को अंजाम दिया है।

सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, अवेयरनेस पर भी रहेगा जोर

सीसीएसयू का काम सिर्फ अपराधियों को जेल भेजना ही नहीं होगा, बल्कि यह टीम आम जनता के बीच जाकर उन्हें साइबर फ्रॉड से बचने के तरीके भी सिखाएगी। पुलिस का मानना है कि अगर लोग जागरूक होंगे, तो डिजिटल ठगी के मामलों में शुरुआत में ही भारी कमी लाई जा सकती है।

अत्याधुनिक साइबर लैब से कसी जाएगी नकेल

आने वाले दिनों में इस यूनिट को एक बेहद एडवांस साइबर लैब, रीयल-टाइम डेटा ट्रैकिंग सिस्टम और आधुनिक सर्विलांस टूल्स सौंपे जाएंगे। इसकी मदद से संदिग्ध ऑनलाइन ट्रांजेक्शन, मोबाइल नेटवर्क की गतिविधियों और सोशल मीडिया के जरिए होने वाले अपराधों पर रियल-टाइम निगरानी रखना संभव हो सकेगा।



Source link

Leave A Reply

Your email address will not be published.