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15 साल बाद लालू यादव पर कोर्ट का शिकंजा! इस मामले में आरोप गठित, ट्रायल शुरू



बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव शुक्रवार को करीब 15 साल पुराने आदर्श आचार संहिता उल्लंघन के मामले में सीवान न्यायालय में पेश हुए।

न्यूज11 भारत/पटना डेस्क: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव शुक्रवार को करीब 15 साल पुराने आदर्श आचार संहिता उल्लंघन के मामले में सीवान न्यायालय में पेश हुए।

एसीजेएम-1 अरविंद कुमार सिंह की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान न्यायालय ने उनके खिलाफ लगे आरोपों का सारांश सुनाते हुए आरोप गठित किया।

हालांकि, लालू प्रसाद यादव ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया। इसके साथ ही मामला ट्रायल में चला गया है। अब इस मामले में गवाही की प्रक्रिया शुरू होगी।

मामला 8 अक्टूबर 2011 का है। उस समय लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे और बिहार विधानसभा चुनाव चल रहा था। दारौंदा विधानसभा क्षेत्र से परमेश्वर सिंह प्रत्याशी थे।

आरोप है कि चुनाव प्रचार के दौरान निर्धारित समय शाम पांच बजे के बाद भी सभा की गई। साथ ही, लाउडस्पीकर का इस्तेमाल किया गया।

इसको लेकर दारौंदा के तत्कालीन अंचलाधिकारी शंकर महतो ने लालू प्रसाद यादव और प्रत्याशी परमेश्वर सिंह के खिलाफ आचार संहिता उल्लंघन का मामला दर्ज कराया था।

इस मामले को कांड संख्या 146/11 के रूप में दर्ज किया गया था।

15 साल में कब क्या हुआ?

  • 8 अक्टूबर 2011: विधानसभा चुनाव के दौरान निर्धारित समय शाम 5 बजे के बाद सभा करने और लाउडस्पीकर बजाने के आरोप में तत्कालीन सीओ शंकर महतो ने लालू प्रसाद यादव और परमेश्वर सिंह के खिलाफ मामला दर्ज कराया।
  • 8 दिसंबर 2011: पुलिस ने दोनों आरोपितों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। इसके बाद न्यायालय से समन जारी हुआ।
  • 13 मई 2015: न्यायालय में उपस्थित नहीं होने पर दोनों आरोपितों के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया गया।
  • 10 मई 2019: लगातार अनुपस्थित रहने पर न्यायालय ने दोनों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया। इसके बावजूद दोनों न्यायालय में पेश नहीं हुए।
  • 17 मई 2022: इसी बीच तत्कालीन प्रत्याशी परमेश्वर सिंह का निधन हो गया। इसके बाद मामले में लालू प्रसाद यादव एकमात्र जीवित आरोपी रह गए। उन्हें न्यायालय में उपस्थित कराने के लिए इश्तेहार जारी किया गया।
  • 30 मई 2025: लालू प्रसाद यादव के अधिवक्ता कामेश्वर तिवारी ने बताया कि इश्तेहार जारी होने के बाद लालू प्रसाद यादव को इस मामले की जानकारी हुई।
  • इसके बाद उनकी ओर से सीआरपीसी की धारा 205 के तहत व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट के लिए न्यायालय में याचिका दाखिल की गई।
  • इसमें किडनी ट्रांसप्लांट और बीमारी से संबंधित मेडिकल साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए। इस पर न्यायालय ने व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट देते हुए शर्त रखी कि जब भी अदालत उन्हें उपस्थित होने का आदेश देगी, उन्हें हाजिर होना होगा।
  • 6 नवंबर 2026: न्यायालय के पूर्व आदेश के अनुपालन में लालू प्रसाद यादव शुक्रवार को सीवान पहुंचे। एसीजेएम-1 अरविंद कुमार सिंह की अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश हुए।

सुनवाई के दौरान अदालत ने उनके खिलाफ लगे आरोपों का सारांश सुनाया और आरोप गठित किया। लालू प्रसाद यादव ने आरोपों को स्वीकार नहीं किया और खुद को निर्दोष बताया।

न्यायालय में आरोप गठित होने और लालू प्रसाद यादव की ओर से आरोपों से इनकार किए जाने के बाद मामला ट्रायल की प्रक्रिया में प्रवेश कर गया है।

अब अभियोजन पक्ष की ओर से गवाहों को प्रस्तुत किया जाएगा। गवाही और साक्ष्यों के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया पूरी होगी। इसके बाद न्यायालय मामले में अपना फैसला सुनाएगा।





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