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सरेंडर से पहले अनंत सिंह का शक्ति प्रदर्शन! 100 से ज्यादा गाड़ियों के काफिले के साथ प्रयागराज रवाना



बिहार की सियासत में बाहुबली विधायक अनंत सिंह एक बार फिर चर्चा में हैं।

न्यूज11 भारत/बिहार डेस्क
रोहित/पटना:
बिहार की सियासत में बाहुबली विधायक अनंत सिंह एक बार फिर चर्चा में हैं। दुलारचंद यादव हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट के सरेंडर आदेश और विधानसभा की सदस्यता से जुड़े नोटिस के बीच अनंत सिंह 100 से अधिक गाड़ियों के काफिले के साथ पटना से प्रयागराज के लिए रवाना हुए हैं। उनके इस काफिले को राजनीतिक गलियारों में शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। रास्ते में कई जगहों पर समर्थकों ने भव्य स्वागत की तैयारी की है।

पटना से रवाना होने के दौरान अनंत सिंह ने कहा कि वह अपने पुराने मित्र पप्पू सलमान के घर शादी समारोह में शामिल होने प्रयागराज जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं। बिहार ही नहीं, पूरे देश में मेरे समर्थक हैं।”

विधानसभा के नोटिस पर बोले- शादी के बाद देंगे जवाब

बिहार विधानसभा सचिवालय की ओर से सदस्यता समाप्त करने से जुड़े मामले में सात दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है। इस पर अनंत सिंह ने कहा कि वह शादी के बाद अपना जवाब देंगे। उन्होंने साफ कहा, “पहले अपना काम करूंगा, फिर जवाब दूंगा। इसमें कोई दिक्कत नहीं है।”

अनंत सिंह ने यह भी कहा कि अपनी बेटी की शादी का निमंत्रण देने के लिए वह राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव समेत सभी नेताओं के घर जाएंगे। उनके मुताबिक, राजनीति अपनी जगह है और बेटी की शादी अपनी जगह।

100 से ज्यादा गाड़ियों का काफिला, जगह-जगह स्वागत की तैयारी

अनंत सिंह के प्रयागराज दौरे को लेकर समर्थकों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। पटना से प्रयागराज तक भव्य स्वागत और रोड शो की तैयारी की गई है। आरा, बक्सर, मोहनिया और वाराणसी होते हुए उनके रात करीब 9 बजे प्रयागराज पहुंचने का कार्यक्रम बताया गया है।

बिहार और उत्तर प्रदेश में कई जगहों पर समर्थकों की ओर से स्वागत कार्यक्रम आयोजित किए जाने की तैयारी है। इतने बड़े काफिले और समर्थकों की मौजूदगी को सरेंडर से पहले अनंत सिंह की ताकत दिखाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।

4 दिसंबर तक सरेंडर करना है, 25 नवंबर को बेटी की शादी

दरअसल, दुलारचंद यादव हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने अनंत सिंह को 4 दिसंबर तक या उससे पहले संबंधित जांच अधिकारी के सामने सरेंडर करने का निर्देश दिया है। वहीं, उनकी छोटी बेटी शिवांगी की शादी 25 नवंबर को होनी है।

ऐसे में एक तरफ अनंत सिंह परिवार में शादी की तैयारियों में जुटे हैं, तो दूसरी तरफ उनके सामने कानूनी और राजनीतिक चुनौतियां भी खड़ी हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के जमानत आदेश पर लगाई रोक

दुलारचंद यादव हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के 19 मार्च 2026 के जमानत आदेश को अगली सुनवाई तक निलंबित कर दिया है। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने अनंत सिंह के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों और आरोपों की गंभीरता पर हाईकोर्ट के विचार को लेकर सवाल उठाए।

सुप्रीम कोर्ट ने जांच अधिकारी को चार महीने के भीतर जांच पूरी कर पूरक आरोपपत्र दाखिल करने का निर्देश भी दिया है। हालांकि, जमानत रद्द करने पर अंतिम फैसला अभी नहीं आया है।

‘मेरी गाड़ी घटनास्थल से 5 किलोमीटर दूर थी, मुझे फंसाया जा रहा’

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बीच अनंत सिंह ने एक इंटरव्यू में खुद को निर्दोष बताते हुए अपना पक्ष रखा था। उन्होंने दावा किया था कि जिस समय मोकामा में विवाद और हिंसा हुई, उस वक्त उनकी गाड़ी घटनास्थल से करीब पांच किलोमीटर आगे निकल चुकी थी।

अनंत सिंह के मुताबिक, 30 अक्टूबर 2025 को चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें पीछे चल रही गाड़ियों में विवाद होने की जानकारी मिली थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें इस मामले में फंसाया जा रहा है। हालांकि, यह उनका अपना दावा है और मामले में कानूनी प्रक्रिया जारी है।

क्या है दुलारचंद यादव हत्याकांड?

30 अक्टूबर 2025 को बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान मोकामा में जन सुराज प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के प्रचार के दौरान हिंसा हुई थी। उस समय अनंत सिंह जदयू के टिकट पर मोकामा से चुनाव लड़ रहे थे, जबकि दुलारचंद यादव जन सुराज प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार कर रहे थे।

इसी दौरान दोनों पक्षों के काफिले आमने-सामने आ गए और हिंसक झड़प हुई। इस घटना में दुलारचंद यादव की मौत हो गई थी। इसके बाद पुलिस ने अनंत सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। जेल में रहते हुए भी उन्होंने मोकामा विधानसभा सीट से चुनाव जीत लिया था।

मार्च 2026 में पटना हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद वह जेल से बाहर आए थे। अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद उन्हें 4 दिसंबर तक सरेंडर करना है।

जदयू से निष्कासन और विधानसभा की सदस्यता पर भी संकट

अनंत सिंह की मुश्किलें केवल कानूनी मोर्चे पर ही नहीं हैं। जदयू ने 24 अक्टूबर को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में उन्हें और उनकी पत्नी नीलम देवी को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था।

इसके बाद जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अनंत सिंह की सदस्यता समाप्त करने की अनुशंसा की थी। इस मामले में विधानसभा सचिवालय की ओर से उन्हें सात दिनों के भीतर जवाब देने का नोटिस जारी किया गया है।

फिलहाल अनंत सिंह का पूरा ध्यान बेटी की शादी और प्रयागराज दौरे पर है। उन्होंने विधानसभा के नोटिस पर शादी के बाद जवाब देने की बात कही है। अब देखना होगा कि शादी के बाद अनंत सिंह की अगली राजनीतिक और कानूनी रणनीति क्या होती है।





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