नीट पुनर्परीक्षा 2026 में फर्जी अभ्यर्थियों को बैठाने के मामले में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने एक और आरोपित प्रमोद कुमार को गिरफ्तार किया है।
न्यूज11 भारत/पटना डेस्क: नीट पुनर्परीक्षा 2026 में मूल परीक्षार्थियों की जगह स्कॉलर यानी फर्जी अभ्यर्थियों को बैठाने के मामले में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने एक और आरोपित प्रमोद कुमार को गिरफ्तार किया है। उसे नौ अक्टूबर को गिरफ्तार करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
प्रमोद पर लखीसराय में नीट परीक्षा के बायोमीट्रिक सत्यापन का टेंडर लेने और कथित तौर पर फर्जी परीक्षार्थियों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिलाने में मिलीभगत का आरोप है।
जानकारी के अनुसार, इस मामले में परीक्षा केंद्र पर पहचान सत्यापन की प्रक्रिया में गड़बड़ी किए जाने की आशंका है। जांच एजेंसी अब यह पता लगा रही है कि इस पूरे मामले में किन लोगों की क्या भूमिका थी और फर्जी अभ्यर्थियों को परीक्षा में शामिल कराने की व्यवस्था कैसे की गई।
21 जून 2026 को लखीसराय के केंद्रीय विद्यालय, खगौर परीक्षा केंद्र पर नीट पुनर्परीक्षा के दौरान मूल अभ्यर्थियों की जगह स्कॉलर के शामिल होने की कोशिश का मामला सामने आया था। इस संबंध में किऊल थाना कांड संख्या 64/2026 दर्ज किया गया था। मामले में परीक्षार्थियों, कथित फर्जी परीक्षार्थियों, बायोमीट्रिक ऑपरेटरों और सुपरवाइजर समेत 27 लोगों को नामजद किया गया था। बाद में जांच ईओयू को सौंप दी गई।
ईओयू के मुताबिक, जांच के दौरान प्रमोद कुमार ने अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। एजेंसी का कहना है कि उसने बताया कि विकास कुमार और राहुल के माध्यम से बायोमीट्रिक सत्यापन का टेंडर लिया था।
इसके बाद मो. शहजाद, सुबोध और रोहित कुमार उर्फ मुरारी की कथित मिलीभगत से बायोमीट्रिक ऑपरेटरों की मदद लेकर मूल परीक्षार्थियों की जगह फर्जी अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश कराया गया। जांच एजेंसी अब इन आरोपों से जुड़े साक्ष्यों और संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
